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माह-ए-मुहर्रम: 321 साल में पहली बार नहीं रखा जाएगा फूलों का ताजिया

Fri, 21 Aug 2020 11:59 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा

सार

इस्लामिक कैलेंडर माह-ए-मुहर्रम में कोरोना संक्रमण की गाइड लाइन के मुताबिक इस बार ताजियेदारी नहीं होगी। सार्वजनिक जुलूस और
मजलिसों के आयोजन भी रोक है। ऐसे में जो ताजिये दफनाए नहीं जाते और घरों में ही रखे जाते हैं। केवल वही रखे जाएंगे। नए
ताजिए नहीं बनेंगे। 
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फूलों का ताजिया (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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चांद दिखाई देने के साथ ही शुक्रवार से माह-ए-मुहर्रम शुरू हो गया। इस्लामिक नए साल की शुरुआत के साथ ही इस माह में करबला की जंग और हजरत इमाम हुसैन और उनके परिवार की शहादत को याद किया जाएगा। 321 साल में पहली बार ऐसा होगा, जब कटरा दबकैय्यान इमामबाड़े में एतिहासिक फूलों का ताजिया नहीं रखा जाएगा।
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इस्लामिक कैलेंडर माह-ए-मुहर्रम में कोरोना संक्रमण की गाइड लाइन के मुताबिक इस बार ताजियेदारी नहीं होगी। सार्वजनिक जुलूस और मजलिसों के आयोजन भी रोक है। ऐसे में जो ताजिये दफनाए नहीं जाते और घरों में ही रखे जाते हैं। केवल वही रखे जाएंगे। नए ताजिये नहीं बनेंगे। मुस्लिम फातिहाख्वानी कर सकेंगे। शिया मुस्लिम भी अलम व ताजिये के जुलूस नहीं निकालेंगे।

आगरा में प्राचीन फूलों का ताजिया कटरा दबकैय्यान इमामबाड़े में मुगलकाल से रखा जाता है। फूलों के ताजिये की इंतजामिया कमेटी के चौधरी सरफराज चौधरी ने बताया कि वह प्रशासन की गाइड लाइन का पालन करेंगे। इसी ताजिये के रखने के बाद शहरभर के ताजिये रखे जाते हैं। मुहर्रम की दसवीं पर भी फूलों का ताजिया उठाए जाने के बाद ही अन्य ताजियों को उठाया जाता है। 
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महिलाएं उतार देंगी सुहाग की निशानी, पहनेंगी काले लिबास
शिया समुदाय में मुहर्रम का चांद दिखने के साथ ही महिलाएं मातम शुरू कर देती हैं। वह सुहाग की निशानी उतारने के बाद 8 रबी उल अव्वल तक किसी भी तरह के साज श्रृंगार से दूर रहेंगी। इस दौरान काले लिबास पहनेंगी और मातम मनाएंगी। अंजुमन-ए-पंजेतनी के अमीर अहमद ने बताया कि यह गम का महीना है। इसमें किसी तरह के मांगलिक कार्य नहीं होते हैं। पूरे माह हजरत इमाम हुसैन व उनके परिवार के 72 लोगों की शहादत का गम मनाया जाता है। 
 
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