मथुरा में मोहन भागवत ने सिर्फ एक ही संदेश दिया। हिंदुत्व की धार को हर तबके का साथ मिलना चाहिए... तभी बात बनेगी। मुस्लिमों को लेकर भी बड़ा फैसला लिया गया। जानें और क्या फैसले लिए गए।
मथुरा में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के दस दिवसीय शिविर में संघ प्रमुख मोहन भागवत का एक ही संदेश साफ रहा। थिंक टैंक ने इस पर मंथन किया और निचोड़ यह रहा कि हिंदुत्व को लेकर मजबूती से आगे बढ़ना होगा। इसकी धार तेज करनी होगी पर इसमें सभी का साथ जरूरी है।
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हर तबका जुड़ा हो। माना जा रहा है कि खास तौर पर विधानसभा चुनाव 2027 लोकसभा चुनाव 2029 के मद्देनजर संघ का एक नया रूप अब देखने को मिलेगा। इसी संदेश को दूर तक पहुंचाने का आह्वान करते हुए इस शिविर का समापन किया गया है।
भले ही संघ सीधे तौर पर राजनीति से दूर रहने की बात करता हो पर जिस तरह से लोकसभा चुनाव 2024 में उत्तर प्रदेश में भाजपा को झटका लगा, उसका परिणाम भाजपा से बढ़ती दूरियां भी माना गया।
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हालांकि सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि भाजपा से कोई खींचतान नहीं है हालांकि इसका ट्रायल यूपी में 13 नवंबर को नौ सीटों पर होने वाले उपचुनाव में देखने को मिलेगा।
मुस्लिमों को नहीं छोड़ सकते
बैठक में यह भी तय हुआ कि शत प्रतिशत मुस्लिमों को दरकिनार नहीं किया जा सकता। संघ प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष अब दोनों रूपों में मुस्लिमों को संघ से ज्यादा से ज्यादा संख्या में जोड़ने का काम करेगा। यही कारण है कि मुस्लिमों के गांवों में भी शाखाएं लगाने का लक्ष्य तय किया गया है। संघ थिंक टैंक का मानना है कि मुस्लिमों में एक बड़ा वर्ग ऐसा है जो संघ से जुड़ना चाहता है। जो परिवर्तन चाहता है। संघ को उसके मन की बात जानकर बस उस तक पहुंचना होगा।
वैसे तो मथुरा के परखम गांव में संघ का शिविर दस दिन का था पर इसमें तीन दिन विशेष थे। इनमें दो दिन अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक हुई जबकि आखिरी दिन सोमवार को अखिल भारतीय कार्यकारिणी की बैठक हुई।
संघ के नौ प्रमुख लोग लगातार टोलियों के साथ बैठक करते रहे। इसके अलावा संघ प्रमुख मोहन भागवत ने भी टोलियों को संदेश देने के अलावा मंडल और कार्यकारिणी की बैठक में स्पष्ट संदेश दिया।
...और तेज करनी होगी हिंदुत्व की धार
बैठक में सबसे ज्यादा चर्चा इसी पर रही हिंदुत्व की धार और तेज करनी होगी। हालांकि साथ ही इस पर भी सहमति रही कि अन्य सभी तबकों को भी जोड़ना होगा। खास तौर पर हिंदुओं की सभी बिरादरियों को एकजुट करना होगा। इनमें बंटवारे से नुकसान हो रहा है।
नाराजगी को दूर करने में जुटेगा संघ
जिस तरह से ठाकुर या दूसरी बिरादरी नाराज हुई, उसका असर इतना ज्यादा नहीं होता यदि संघ सक्रिय रूप से काम करता। इस बार ये गिले शिकवे दूर होते नजर आ रहे हैं। सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी दो घंटे इस शिविर में बिताए और संघ प्रमुख से बात की, इससे यह साफ हो गया है दोनों आगे की राह प्रशस्त करने पर एकजुट होकर लगेंगे। इस मुहिम का पहला परिणाम विधानसभा चुना 2027 एवं दूसरा लोकसभा चुनाव 2029 में देखने का लक्ष्य है।
मुद्दों की गूंज कम न हो
बैठक में एक बात और अहम रूप से सामने आई। मथुरा में इस बैठक को करने के भी निहितार्थ तलाशे जा रहे हैं। अयोध्या में मंदिर बन चुका है। मथुरा का मामला कोर्ट में विचाराधीन है। हालांकि संघ स्पष्ट कह चुका है कि हर जगह अयोध्या का तरीका यानी कारसेवा का तरीका अपनाना सही नहीं पर संदेश यह भी साफ दिया है कि इससे भी लोगों को जुड़ना होगा। वैचारिक जनांदोलन तो कम से कम कम चलाना ही होगा। ज्ञानवापी जैसे मुद्दों पर बात हुई।