मैनपुरी जिले के बरनाहाल निवासी अवधेश और सुनील बघेल दिल्ली में कैटरिंग का काम करते थे। सुनील चाट की ठेल लगाता और अवधेश गोलगप्पे की ठेल लगाता। इससे पुलिस उन्हें आसानी से पकड़ भी नहीं पाती। अगर, इन पर शक भी होता तो पुलिस को झूठ बोलकर बचने की कोशिश करते।
इटावा के जसवंत नगर निवासी आरोपी उदयवीर दिल्ली में जाकर काम करता। इटावा के सिविल लाइंस निवासी सुनील कुशवाह और फिरोजाबाद के फरिहा निवासी संजू कैटर्स के यहां मजदूरी करते थे। इन्होंने बताया कि वे रकम बैंक में जमा कराते और हर महीने ब्याज निकालते।
सुनील ने बनाया था गिरोह
पुलिस ने बताया कि कमला नगर के व्यापारी के घर की रेकी उनके पूर्व नौकर ने करवाई थी। नौकर का परिचय पकड़े गए सुनील बघेल से ही था। सुनील बघेल जगदीशपुरा से वर्ष 2013 में डकैती और हत्या के मामले में जेल जा चुका है। जमानत पर छूटने के बाद वह काम करने दिल्ली चला गया। वह दिल्ली से ही वारदात करने आया था। उसने एक-एक करके अपने साथियों को एकत्रित करके गिरोह बनाया था।