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पलायनः चलते-चलते पैरों में पड़े छाले, न लगाने को मरहम और न रुकने का वक्त

Wed, 29 Apr 2020 03:03 PM IST
Abhishek Saxena रैना पालीवाल, अमर उजाला, आगरा
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घर जाने के लिए निकले मजदूर - फोटो : अमर उजाला
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आगरा जनपद का किरावली कस्बा, रात के एक बज गए हैं। लोग चैन की नींद सोए हैं लेकिन हाईवे जाग रहा है। पलायन की त्रासदी आह भरते हुए सड़क से गुजर रही है। जर्जर काया, क्लांत चेहरे और कराहते कदम... इन मजदूरों का यही चित्रण है। इनके पास खुद को दांव पर लगाने के अलावा कुछ भी नहीं है।
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इसलिए अपने कदमों से सुरसा सी दूरी तय करने निकले हैं। चार दिन से चल रहे हैं। न पत्थर की सड़क ही पसीजती है और न मानुष। देखकर भी अनेदेखे कर दिए जाते हैं। सदियों से पाशविक व्यवहार सहते आए हैं। हाड़-मांस के ये गट्ठर बड़ी उम्मीद से पीछे देखते हैं। ट्रक आते हैं और इनके पास से होकर गुजर जाते हैं। ये हाथ देते रह जाते हैं।

लॉकडाउन में पिसने वाले ये मजदूर जोधपुर से अपने घरों के लिए निकले हैं। अधिकांश को फतेहपुर जाना है और कुछ को कानपुर। चार दिन में अपने पैरों से 540 किमी की दूरी पार कर आए हैं। अभी करीब 380 किमी और चलना है। चार दिन में कहीं चावल मिला तो कहीं रोटी। पिछले नौ घंटे से कुछ खाया नहीं है।
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साइकिल खरीदकर घरों को निकले मजदूर - फोटो : अमर उजाला
संवाददाता को देखकर ठिठक जाते हैं। कुछ आगे बढ़ जाते हैं। रुकने का वक्त ही कहां है। छालों पर लगाने के लिए मरहम भी कहां है। 12 लोग कतार में बढ़े जा रहे हैं। वृद्ध भोला सिंह कहते हैं, स्टील लेन में काम करते थे। लॉकडाउन के बाद सब बंद हो गया। सेठ लोग अपने घर चले गए। पैसे खत्म हो रहे थे, खाने का संकट था। इसलिए पैदल घरों के लिए निकले। मुसीबत में घर ही याद आता है साहब। कोई वाहन नहीं रोकता।

शाम चार बजे खाए थे। जब से कुछ नहीं मिला। आगे देखेंगे। एक-दो घंटे के लिए फुटपाथ पर सो जाते हैं। राजेंद्र सिंह, धरम सिंह, खुमान सिंह ने बताया, जेब में 100-200 रुपये पड़े हैं। कमरे में कब तक रुकते। मैंने बसों का पूछा तो बोले, हमारी तरफ कोई बस नहीं चली। भूख लगी है पर क्या करें। इसी से तो भाग रहे हैं। कैसे भी घर पहुंच जाएं।

बेबस मजदूरों की दारुण दशा देख मन भर आया लेकिन इस समय उन्हें बिस्किट के अलावा कुछ न दे सके। जब उनकी तरफ बढ़ाए तो बिना देखे हाथों में भर लिए। बहुत धन्यवाद साहब आपका। आंखों में नमी लिए हम तो घर लौट आए लेकिन वे लौट सकेंगे!

नई साइकिल खरीदकर घरों को निकले मजदूर
हाईवे पर सुबह-शाम मजदूरों को घर जाते देखा जा सकता है। शाम को आठ-दस मजदूर नई साइकिलों पर सवार होकर जा रहे थे। पूछने पर बताया, जोधपुर से आए हैं। घर जाने के लिए साइकिल खरीदी। खाने-पीने को कुछ नहीं मिल रहा। बस जल्द से जल्द घर पहुंच जाएं।
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