चिकित्सा शिक्षामंत्री आशुतोष टंडन ने एसएन मेडिकल कालेज के निरीक्षण की शुरुआत 10:30 बजे इमरजेंसी से की। साफ-सफाई बदहाल थी। दूसरी मंजिल पर ट्रामा सेंटर पहुंचे, यहां मरीज कम मिले। मरीजों ने दवाएं बाहर से मंगवाने की शिकायत की। यहां से मंत्री ओपीडी के पर्चा काउंटर में गए और मरीजों की संख्या पूछी। ओपीडी में वाटर कूलर खराब था, टोंटी टूटी हुई थी। शौचालय का हाल भी देखा।
मरीजों ने दवाएं और जांच बाहर से करवाने की शिकायत की। ब्लड बैंक गए और प्रभारी से रक्त के रखरखाव की जानकारी मांगी। रजिस्टर भी देखे। मंत्री ने करीब एक घंटे के निरीक्षण में मरीजों से मिली शिकायतों के समाधान कराने के बाद रिपोर्ट करने के निर्देश दिए। प्राचार्य डा. सरोज सिंह ने बताया कि मंत्री जो भी निर्देश दिए हैं, उनको दुरुस्त कराया जाएगा।
पोंछा रोज लगाते हो या हमे देखकर आज ही लगा रहे हो
ओपीडी गैलरी : मंत्री ने पोंछा लगाते हुए कर्मचारी को बुलाया, हमें आते देख पोंछा लगा रहे हो कि रोजाना लगता है। कर्मचारी सकपका गया। बोला, नहीं साहब, दिन में तीन बार पोंछा लगाता हूं। मंत्री बोले, बताओ कहां-कहां लगाया। उसने ओपीडी के कक्षों के नाम गिनाए।
प्राचार्य से बोले, दानदाताओं का तो ख्याल रखिए
ओपीडी गैलरी : एक वाटर कूलर, वह भी खराब मिला। मंत्री ने टोंटी खोलकर देखी तो पानी नहीं आ रहा। वाटर कूलर पर धूल जमती देख मंत्री बोले, लगता है कि ये चला ही नहीं। कूलर पर दानदाता संस्था का नाम पढ़ा और प्राचार्य को तल्ख लहजे में इसे दुरुस्त करने को कहा। बोले, दानदाताओं का ख्याल तो रखिए, एक वाटर कूलर वह भी खराब।
कर्मचारी से पूछा, अभी तक कितने पर्चे बन गए हैं
पर्चा काउंटर कक्ष में प्रवेश कर पूछा कि कितने पर्चा बन गए हैं। काउंटर पर बैठी महिला कर्मचारी ने बताया कि अभी तक 742 पर्चे बन गए हैं। प्राचार्य से भी पूछा कितने मरीज रहते हैं। बताया कि दो हजार से अधिक रहते हैं, फॉलोअप के मरीज भी रहते हैं।
ये तीन मिली बड़ी शिकायतें
- दवाएं बाहर से मंगवाते हैं, जांच भी बाहर से करवाई जाती है। आपरेशन को कई दिनों बाद की तारीख देते हैं
- एड्स पीड़ितों ने इलाज में लापरवाही की बात कही, भर्ती करने से भी डाक्टर बचते हैं, लौटा दिया जाता है।
- बाल रोग विभाग के एनआईसीयू में वेंटिलेटर-एसी अक्सर खराब रहते हैं। आए दिन नवजात की मौत होती।
ये तीन दिए आश्वासन:
पहला: बीएससी नर्सिंग कालेज की लिए शिक्षकों के पद सृजन कर जल्द इसे चालू कराया जाएगा। इसके लिए मुख्यमंत्री से मिलकर जल्द प्रस्ताव को अंतिम रूप दिया जाएगा।
दूसरा: प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के तहत एसएन मेडिकल कालेज को 200 करोड़ रुपये से एम्स सरीखी चिकित्सकीय सेवाएं विकसित की जाएंगी।
तीसरा: दवाओं की किल्लत खत्म करने के लिए बजट की बढ़ोत्तरी की बात कही। कालेज ने 10 करोड़ रुपये बजट की जरूरत बताई थी।
कालेज प्रशासन ने बताईं तीन समस्याएं
- दवाओं के बजट की कमी है, अभी तक एक करोड़ रुपये मिला है, करीब 10 करोड़ रुपये की पड़ती है जरूरत। - नर्सिंग स्टाफ की बेहद कमी, करीब 80 सेवारत हैं। 350 नर्सिंग स्टाफ की और जरूरत, तकनीशियन की भी हो भर्ती।
- कई इमारतें जर्जर हैं, मरीजों को परेशानी रहती है। नए भवनों के लिए बजट बने और सौंदर्यीकरण कराया जाए।
अनुशासन ही भूल गए भाजपाई
निरीक्षण में मंत्री के साथ भाजपाई जुट गए। कई भाजपा नेता खुद ही ‘मंत्री’ की भूमिका में आ गए और मरीज-अधिकारियों से जवाब-तलब करने लगे। मंत्री के नजदीक फोटो फ्रेम में आने के लिए भाजपाई अनुशासन ही भूल गए। धक्का-मुक्की करने लगे।