एक स्कूल में मिड डे मील खाते बच्चे
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मैनपुरी। परिषदीय विद्यालयों में बच्चों को गुणवत्तायुक्त भोजन उपलब्ध कराने के लिए शासन ने धनराशि तो बढ़ा दी है, लेकिन बढ़ी हुई धनराशि का आदेश मजाक जैसा है। इसमें प्रति बच्चा केवल 20 पैसा ही बढ़ाया गया है। ऐसे में सवाल ये है कि इस महंगाई में 20 पैसे से भोजन की गुणवत्ता में क्या सुधार हो सकेगा।
परिषदीय विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों को दोपहर का खाना नि:शुल्क उलपब्ध कराया जाता है। इसके लिए अनाज सीधे मध्याह्न भोजन प्राधिकरण से उपलब्ध कराया जाता है, लेकिन इसकी परिवर्तन लागत के रूप में धनराशि विद्यालय प्रबंध समिति के खाते में भेजी जाती है। अब तक प्राथमिक स्कूल में ये परिवर्तन लागत 4.35 रुपये और जूनियर में 6.51 रुपये प्रति बच्चा दिया जाता था, लेकिन ये धनराशि एमडीएम बनवाने के लिए पर्याप्त नहीं है। इससे शिक्षक परेशान हैं।
इस बार जब प्राधिकरण द्वारा कन्वर्जन कॉस्ट बढ़ाने का आदेश हुआ तो शिक्षकों ने राहत की सांस ली, लेकिन आदेश देखकर वे इसे मजाक बता रहे हैं। दरअसल प्राथमिक विद्यालय में सिर्फ 13 पैसे और जूनियर विद्यालयों में 20 पैसे ही लागत बढ़ाई गई है। इसके बाद अब प्राथमिक स्कूलों में ये धनराशि 4.48 रुपये और जूनियर में 6.71 रुपये हो गई है। बात भी सही है कि महंगाई के इस दौरा में 20 पैसे से आखिर गुणवत्ता में क्या सुधार होगा।
एमडीएम में शिक्षकों का शोषण
प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश मंत्री महेंद्र प्रताप सिंह से जब इस बारे में बात की गई तो उन्होंने एमडीएम में शिक्षकों का शोषण करने की बात कही। उन्होंने बताया कि शिक्षक अपनी जेब से एमडीएम का संचालन करते हैं। कई बार तो पूरे साल तक धनराशि नहीं मिलती हैं। वहीं अब इतनी कम धनराशि बढ़ाकर गुणवत्ता युक्त भोजन का दबाव बनाया जाएगा, जो सही नहीं है।