रैगिंग रोकने की पूरी जिम्मेदारी अब मेडिकल कॉलेजों की होगी। एफआईआर दर्ज कराने के बाद यदि समझौता होता है तो भी दोषी छात्र के खिलाफ कार्रवाई करनी होगी। रैगिंग पर अंकुश लगाने में नाकाम कॉलेज एमबीबीएस की सीटें गंवा सकते हैं। दिल्ली में हुई एंटी रैगिंग कमेटी ने एंटी रैगिंग नियमाें में यह नए प्रावधान जोड़े हैं।
उच्च शिक्षा संस्थानाें में रैगिंग खत्म कराने के लिए पांच जून को दिल्ली में एमसीआई, इंडियन नर्सिंग काउंसिल, यूजीसी, तकनीकी शिक्षा के अधिकारियाें की बैठक हुई। इसमें एंटी रैगिंग कमेटी ने नए प्रावधान का पालन कराने के सख्त निर्देश दिए हैं। बैठक में एसएन मेडिकल कॉलेज का एंटी रैगिंग सेल के अध्यक्ष डा. एसके कठारिया ने प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने बताया कि कॉलेजाें को रैगिंग की जानकारी ऑनलाइन देनी होगी। कार्रवाई को भी अपडेट करना होगा। फर्जी शिकायत और गवाही बदलने वाले छात्र भी कार्रवाई की जद में होंगे। हर महीने दिल्ली की मुख्य कमेटी से वीडियो कांफ्रेंस कर मामलाें की जानकारी देनी होगी।
नए नियम काफी सख्त हैं। रैगिंग की घटनाएं ज्यादा होने पर सीटें कम करने का भी प्रावधान किया है। आरोपी छात्र का सस्पेंशन और एडमीशन रिजेक्ट भी किया जा सकता है।
- डा. एसके कठारिया, अध्यक्ष, एंटी रैगिंग सेल, एसएन मेडिकल कॉलेज
एसएन, कानपुर मेडिकल कॉलेज बदनाम
बैठक में एसएन मेडिकल कॉलेज और कानपुर मेडिकल कॉलेज के रैगिंग के सबसे ज्यादा मामले सामने आए। मॉनीटरिंग कमेटी के डीजीसी डा. आरके राघवन ने दोनाें ही कॉलेज के प्रतिनिधियाें को सख्त चेतावनी दी है।
हर वर्ग के लिए नोडल प्रभारी
- अब हर जेंडर, धार्मिक और जाति वर्ग के अलग-अलग नोडल प्रभारी बनेंगे। इसमें ट्रांस जेंडर, एससीएसटी, धार्मिक विभाग बनेगा। इसमें पदों पर नियुक्ति कॉलेज स्तर पर होगी।
व्यक्तित्व पर टिप्पणी भी रैगिंग
- किसी भी छात्र के व्यक्तित्व पर टिप्पणी करना भी रैगिंग में शामिल है। पढ़ाई, शारीरिक रूप से कमजोर, रंग, कद-काठी, सरनेम, धार्मिक पहचान पर भी टिप्पणी नहीं की जा सकती। यहां तक कि किसी भी छात्र को उसके क्षेत्र के नाम से भी नहीं बुलाया जाएगा।
प्रवेश फार्म पर लिखे हाेंगे नियम
होर्डिंग, बैनर, दीवार पर एंटी रैगिंग नियम चस्पा करने के अलावा प्रवेश फार्म, कॉलेज की प्रॉसपेक्टस पर भी इसका जिक्र करना होगा। वहीं, इस तरह के होर्डिंग पुस्तकालय, क्लासरूम, हास्टल, शौचालय, वार्ड और ओपीडी में लगाने होंगे।