पितृ पक्ष में जहां लोग अपने पितरों का श्राद्ध कर्म करके उनका तर्पण कर रहे हैं। वहीं मथुरा के गांव कुड़वारा के लोगों ने खुले में घूमने वाली एक गाय के मरने पर न सिर्फ उसे हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार समाधि दी, बल्कि 12वें दिन उस गाय की आत्मा की शांति के लिए पंडितों और 101 कन्याओं को भोज करवाकर भंडारा भी किया।
जानवरों के प्रति अगाध प्रेम की इस मिसाल की चर्चा शनिवार को मांट क्षेत्र के कई गांवों में रही। खास बात यह रही कि इस पूरे क्रिया-कर्म और भंडारे में गांव के एक मुस्लिम युवक और उसके परिवार ने भी अपना विशेष सहयोग दिया।
मांट क्षेत्र के गांव कुड़वारा में शनिवार को गाय के प्रति अगाध श्रद्धा और हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल देखने को मिली। तीन सितंबर को गांव में खुले में घूमने वाली एक वृद्ध गाय की मौत हो गई थी। ग्रामीणों के अनुसार गाय गांव की गलियों में घूमकर किसी तरह अपना पेट भरती थी। जब गाय की मौत हो गई तो ग्रामीणों ने एकजुट होकर गाय के अंतिम संस्कार की ठानी।
गाय को समाधि दी
ग्रामीणों को कराया गया भोज
- फोटो : अमर उजाला
ग्रामीण उसे बुग्गी में लाद कर गांव के बाहर ले गए और गड्ढा खोदकर गाय को समाधि दी। इसके बाद गाय की आत्मा की शांति के लिए 12वें दिन भंडारे का निर्णय लिया। चूंकि कर्मकांड के अनुसार विशाल भंडारे के लिए काफी पैसा चाहिए था तो सबने आपस में चंदा किया और छह-सात गांव के लोगों को भंडारे का न्यौता भेजा।
शनिवार को हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार सबसे पहले 12 पंडित और उसके बाद 101 कन्याओं को भोज कराया गया। इसके बाद चार-पांच गांव और चार स्कूलों के बच्चों सहित तकरीबन चार हजार लोगों को भोज में मालपुआ और सब्जी का प्रसाद बांटा गया।
भंडारा रामफल सिंह इंटर कॉलेज में आयोजित किया गया था। स्कूल के चेयरमैन जयवीर सिंह ने बताया कि भंडारे में नगला खैंमा, धनी का नगला, सिर्रैला, लाल गढ़ी आदि गांवों के लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया।
भंडारे के लिए जमा किया एक लाख रुपये का चंदा
गाय को समाधि देने और उसकी आत्मा की शांति के लिए भंडारा करने में गांव के करुआ सिंह, पवन शर्मा, बदन सिंह, रामवीर सिंह, हाकिम खान, मनवीर सिंह आदि का विशेष सहयोग रहा। सभी के सहयोग से भंडारे लिए चंदे से करीब एक लाख रुपया जमा किया गया।
हाकिम खान और उसके परिवार ने दिया पूरा सहयोग
गाय के अंतिम संस्कार से लेकर भंडारे तक जो भी आयोजन हुआ उसमें गांव के मुस्लिम युवक हाकिम खान और उसके परिवार ने पूरा सहयोग दिया। ग्रामीणों का कहना है कि हाकिम का परिवार यूं तो आर्थिक रूप से ज्यादा सक्षम नहीं है। लेकिन इस नेक काम में उसने तन-मन और धन से सभी का साथ दिया।