वृंदावन के रसिया बाबा ने कहा कि यमुना के जल में कीचड़ थी। आस्था के चलते हजारों साधु-संतों ने इस पवित्र धरती पर यमुना में डुबकी लगाई। उन अफसरों को सोचना चाहिए जो शुद्ध जल की बातें बहुत पहले से करते आ रहे थे। अब सुधार कर लें। नौ मार्च को दूसरा शाही स्नान है।
खालसा के पहाड़ी बाबा गंगादास ने कहा कि यमुना में पानी तो था ही नहीं स्नान के लिए। लोगों ने फिर भी डुबकी लगाई। संतों ने डुबकी लगाई। इस स्थिति पर प्रशासन को गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है। कुंभ मेले में पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था भी गड़बड़ा रही है।
श्यामसुंदर नगर के रहने वाले कृष्णगोपालानंद देव गोस्वामी ने कहा कि यमुना दिव्य है, बस देखने का नजरिए अलग-अलग हैं। वो पूजनीय है, उसके भक्तों ने गत दिवस भव्य दर्शन किए हैं। हां, भौतिकवादी नजरिए से इस व्यवस्था में अवश्य सुधार की आवश्यकता है, जिससे यमुना का भौतिकवादी स्वरूप भी सुंदर लगे।