उद्यान विभाग के ऑफिस पर उसने कब्जा कर लिया था। उद्यान विभाग के अफसरों को जवाहरबाग से निकलना पड़ा था। क्योंकि जवाहरबाग में आलू, सरसों और गेहूं की भी खेती होती थी, लेकिन कब्जाधारियों ने सब पर कब्जा जमा लिया था। आलू की खोदाई भी नहीं होने दी।
15 मार्च 2016 को जब उद्यान विभाग जवाहरबाग में लगे आलू की खोदाई करा रहा था। तमाम कर्मचारी और मजदूर खोदाई कर रहे थे। इसी दौरान कब्जाधारियों ने सभी को आलू खोदने से रोक दिया। जब उद्यान विभाग के कर्मचारियों ने विरोध किया तो हंगामा हो गया।
रामवृक्ष और उसके समर्थकों ने आलू की खोदाई कर रहे लोगों पर हमला कर दिया। लाठी-डंडों से पीटा गया। इतना ही नहीं करीब तीन घंटे तक उद्यान विभाग के कर्मचारियों को जवाहरबाग में बंधक बनाकर रखा गया। बाद में पुलिस फोर्स पहुंचने पर सभी को मुक्त कराया गया।
मुकदमा दर्ज होने के बाद भी पुलिस आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए जवाहरबाग में घुस नहीं पाई थी। जवाहरबाग के सभी प्रवेश मार्ग पर रामवृक्ष के लोग डंडे लेकर मुस्तैद रहते थे। अगर कोई घुसने की कोशिश करता था तो उसे दौड़ा लेते थे। यही वजह रही कि वह लगातार जवाहरबाग पर काबिज रहा। पुलिस ने भी कभी दबिश नहीं दी।
जेल में बंद हैं 160 कब्जाधारी
जवाहरबाग के 160 कब्जाधारी जेल में बंद हैं। इनमें 97 पर हत्या का मुकदमा दर्ज है जबकि बाकी पर मारपीट, तोड़फोड़ और आगजनी के केस चल रहे हैं। इनमें से अभी तक तीन लोगों की मौत हो चुकी है। अधिवक्ता एलके गौतम ने बताया कि रामपाल, मेवाराम और बघेलू की जेल में मौत हो गई थी।