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जानिए, मथुरा के जवाहरबाग की वो घटना, जिसमें कोर्ट ने सुनाई 43 लोगों को सजा

Mon, 21 Jan 2019 07:28 PM IST
दुष्यंत शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
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जवाहरबाग - फोटो : अमर उजाला
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मथुरा के जवाहरबाग पर कब्जा करने वाले 43 लोगों को मारपीट मामले में तीन-तीन साल की सजा सुनाई गई है। मामला 15 मार्च 2016 का है। जवाहरबाग में आलू खोदने पहुंचे उद्यान विभाग के कर्मचारी और मजदूरों को कब्जाधारियों ने घेर लिया था। 

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रामवृक्ष यादव और चंदनबोस भीड़ लेकर पहुंचे थे। पहले तो आलू खोदने से रोका, मगर जब वे लोग नहीं रुके तो डंडों से हमला कर दिया था। इतना ही नहीं सभी को जवाहरबाग से बाहर भी नहीं निकलने दिया था। बाद में पुलिस और प्रशासनिक अफसर जवाहरबाग में दाखिल हुए और किसी तरह से सभी को मुक्त कराया। 

रामवृक्ष यादव मार्च 2014 में मथुरा पहुंचा था। उस वक्त उसके साथ 400 लोगों की भीड़ थी। प्रशासन से दो दिन के लिए सत्याग्रह की अनुमति लेकर वह जवाहरबाग में ऐसा घुसा कि फिर निकला ही नहीं। जवाहरबाग पर तो पूरी तरह से कब्जा जमा लिया था। 

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खोदाई कर रहे कर्मचारियों पर हुआ था हमला

उद्यान विभाग के ऑफिस पर उसने कब्जा कर लिया था। उद्यान विभाग के अफसरों को जवाहरबाग से निकलना पड़ा था। क्योंकि जवाहरबाग में आलू, सरसों और गेहूं की भी खेती होती थी, लेकिन कब्जाधारियों ने सब पर कब्जा जमा लिया था। आलू की खोदाई भी नहीं होने दी। 

15 मार्च 2016 को जब उद्यान विभाग जवाहरबाग में लगे आलू की खोदाई करा रहा था। तमाम कर्मचारी और मजदूर खोदाई कर रहे थे। इसी दौरान कब्जाधारियों ने सभी को आलू खोदने से रोक दिया। जब उद्यान विभाग के कर्मचारियों ने विरोध किया तो हंगामा हो गया।

रामवृक्ष और उसके समर्थकों ने आलू की खोदाई कर रहे लोगों पर हमला कर दिया। लाठी-डंडों से पीटा गया। इतना ही नहीं करीब तीन घंटे तक उद्यान विभाग के कर्मचारियों को जवाहरबाग में बंधक बनाकर रखा गया। बाद में पुलिस फोर्स पहुंचने पर सभी को मुक्त कराया गया।  
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जवाहरबाग में नहीं घुस पाई थी पुलिस 

मुकदमा दर्ज होने के बाद भी पुलिस आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए जवाहरबाग में घुस नहीं पाई थी। जवाहरबाग के सभी प्रवेश मार्ग पर रामवृक्ष के लोग डंडे लेकर मुस्तैद रहते थे। अगर कोई घुसने की कोशिश करता था तो उसे दौड़ा लेते थे। यही वजह रही कि वह लगातार जवाहरबाग पर काबिज रहा। पुलिस ने भी कभी दबिश नहीं दी। 

जेल में बंद हैं 160 कब्जाधारी 

जवाहरबाग के 160 कब्जाधारी जेल में बंद हैं। इनमें 97 पर हत्या का मुकदमा दर्ज है जबकि बाकी पर मारपीट, तोड़फोड़ और आगजनी के केस चल रहे हैं। इनमें से अभी तक तीन लोगों की मौत हो चुकी है। अधिवक्ता एलके गौतम ने बताया कि रामपाल, मेवाराम और बघेलू की जेल में मौत हो गई थी।
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