यह था मामला
तीन सदस्यीय जांच समिति ने पाया कि 11 मान्यताविहीन शिक्षण संस्थानों में करीब 2 करोड़ 53 लाख 29 हजार रुपये का गबन हुआ। जबकि, 23 कॉलेजों में पांच हजार से अधिक छात्रों ने कोर्स ही पूरा नहीं किया और उन्हें करीब 9.69 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति मिल गई।
कई निजी आईटीआई कॉलेजों में स्वीकृत सीट के सापेक्ष करीब पांच हजार दाखिले अतिरिक्त कर लिए गए। इन्हें भी छात्रवृत्ति दिलाई गई। वहीं, 38 कॉलेजों में 100 से अधिक समान नाम, पिता का नाम और समान जन्म तिथि वाले फर्जी छात्रों को भी शुल्क भरपाई की गई। यही नहीं फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर भी छात्रों का दाखिले करने और उन्हें छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति कराने का काम भी हुआ।