बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय बार्डर पर शहीद हुए बीएसएफ के हेड कांस्टेबल विजयभान यादव का पार्थिव शरीर शनिवार को उनके गांव चमरौली पहुंचा। गांव में पार्थिव शरीर पहुंचते ही कोहराम मच गया। शहीद की पत्नी और बच्चों के आंसू नहीं थम रहे थे, वहीं बूढ़ी मां बेटे को तिरंगे में लिपटा देख बेसुध हो गई। किसी तरह लोगों ने उन्हें संभाला।
गांव में दो दिन से मातम का सन्नाटा पसरा था। ग्रामीण वीर जवान विजयभान के शव का इंतजार कर रहे थे। शनिवार दोपहर को जैसे ही शहीद विजयभान का शव गांव पहुंचा, भारत माता के जयकारे, जब तक सूरज चांद रहेगा, विजयभान का नाम रहेगा नारे गूंजने लगे। शहीद को अंतिम दर्शन करने को काफी भीड़ उमड़ी।
वहीं प्रशासन और भाजपा नेताओं की बेरुखी के चलते शहीद के परिजनों ने अंतिम संस्कार करने से इंकार कर दिया। परिजनों को गुस्सा था कि तीन दिन बीत जाने के बाद भी जिला प्रशासन उनके दरवाजे तक नहीं आया। इसे लेकर परिजनों के साथ ग्रामीणों में आक्रोश दिखा।