बाजरा खरीद केंद्र पर भ्रष्टाचार के मामले में जिलाधिकारी के आदेश भी बेअसर हैं। डीएम ने प्रमुख सचिव को पत्र लिखकर जिला विपणन अधिकारी सहित चार क्रय केंद्रों के प्रभारियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की संस्तुति की थी। इसके बाद भी कार्रवाई नहीं हुई।
बाजरा क्रय केंद्रों पर हो रहे भ्रष्टाचार पर अंकुश नहीं लग रहा है। जिलाधिकारी अरविंद एम बंगारी की संस्तुति भी बेअसर हो गई। डीएम ने प्रमुख सचिव को पत्र लिखकर जिला विपणन अधिकारी सहित चार क्रय केंद्रों के प्रभारियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की संस्तुति की थी। अधिकारियों को निलंबित करना तो दूर शासन ने कार्रवाई तक नहीं की जिसका खामियाजा अब किसानों को भुगतना पड़ रहा है।
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31 दिसंबर बाजरा खरीद की अंतिम तिथि है। ऐसे में बाजरा खरीद के नाम पर कमीशनखोरी शुरू हो गई है। जगनेर स्थित क्रय केंद्र प्रभारी निखिल सक्सेना पर किसान रामभरत ने 40 हजार रुपये कमीशन लेकर आधे बाजरा की खरीद करने का आरोप लगाया है। एक अन्य किसान से क्रय केंद्र के निजीकर्मी ने 6000 रुपये मांगे। तीन हजार रुपये डिजिटल माध्यम से किसान ने भुगतान किया। बाकी 3000 रुपये नहीं देने पर किसान का बाजरा नहीं खरीदा गया।
यह हाल तब है, जब क्रय केंद्रों पर अनियमितताओं की डीएम ने एडीएम से जांच कराई थी। जांच में प्रथम दृष्ट्या आरोप सही मिलने पर जिला विपणन अधिकारी नंद किशोर, जगनेर क्रय केंद्र प्रभारी निखिल सक्सेना, फतेहपुर सीकरी क्रय केंद्र प्रभारी गया प्रसाद, खेरागढ़ क्रय केंद्र प्रभारी विकास जयंत और जैतपुरकलां केंद्र प्रभारी रीता सेन के विरुद्ध कार्रवाई की संस्तुति प्रमुख सचिव एवं मंत्री को भेजी थी। कार्रवाई नहीं होने से आरोपी अधिकारियों के हौसले बुलंद हैं। इस संबंध में डीएम का कहना है कि क्रय केंद्रों में अनियमितताओं के आरोपी विभागीय अधिकारियों के विरुद्ध शासन को दोबारा अवगत कराया जाएगा।