आगरा में वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में कई छोटे दलों ने दम दिखाया था। प्रत्याशी भी मैदान में उतारे थे, लेकिन इस बार छोटे दल परिदृश्य से गायब हैं। इनमें प्रजातांत्रिक समाजवादी पार्टी (प्रसपा) ने सपा का दामन थाम लिया है। अन्य दलों से जुड़े नेताओं ने भी चुप्पी साध रखी है। इससे माना जा रहा है कि इस बार प्रमुख दलों के बीच दिलचस्प मुकाबला होने वाला है।
हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन औवेसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लमीन (एआईएमआईएम), आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) महान दल, जन अधिकार पार्टी, समान अधिकार पार्टी, समानता दल, अपना दल, राष्ट्रीय व्यापारी पार्टी आदि कई पार्टियों के उम्मीदवार चुनावों के दौरान नजर आते रहे हैं, लेकिन अभी तक किसी छोटे दल ने अपना प्रत्याशी घोषित करने और चुनाव मैदान में उतरने की घोषणा नहीं की है।
यहां तक कि आगरा में पांच बार दौरा करने वाले आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के अध्यक्ष चंद्रशेखर रावण ने भी प्रत्याशी घोषित नहीं किए हैं। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सुनील कुमार चित्तौड़ ने आगरा में संगठन को भी खड़ा किया था लेकिन अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं। इस दल को बसपा का मुख्य प्रतिद्वंद्वी माना जा रहा था। प्रसपा के पदाधिकारी भी सपा से गठबंधन के बाद सपा के साथ हो लिए हैं। इसी तरह अन्य छोटे दल भी इस बार सामने नहीं आए हैं।