उसने कस्टम विभाग से सभी प्रक्रिया पूरी होने के बाद जेवरात भेजने की बात कही। मार्च 2019 से 18 जुलाई 2019 तक तकरीबन 23 लाख रुपये का भुगतान करा लिया। दो बार और भारत बुलाया। मगर, जेवरात नहीं भेजे। इस बारे में पूछने पर टालमटोल करने लगा। एक बार नकली पत्थर भी दे दिए। वह कोरोना संक्रमण की वजह से भारत नहीं आ सकीं। जनवरी में थाना पर्यटन में शिकायत की। इस पर थाना पर्यटन में जांच के बाद मुकदमा दर्ज किया गया।
अंग्रेजी बोलता है, लिखना नहीं जानता
थाना ताजगंज के प्रभारी निरीक्षक जय सिंह परिहार ने बताया कि आरोपी अली हुसैन के खिलाफ धोखाधड़ी, चौथ मांगने और अमानत में खयानत का मुकदमा दर्ज था। उसकी तलाश की जा रही थी। वह फरार हो गया था। रविवार को ताजगंज क्षेत्र में शिल्पग्राम के पास से पकड़ लिया। उससे पूछताछ की। वह ताजमहल के आसपास खड़ा रहता है।
पर्यटकों को झांसे में लेता है। अच्छी अंग्रेजी बोल लेता है। मगर, लिखना नहीं जानता है। अंग्रेजी बोलने की वजह से पर्यटक झांसे में आ जाते हैं। उसका एक्सिस बैंक में खाता है। उसे चेक किया। इसमें रकम नहीं थी। उसने जापानी पर्यटक से लेने के बाद सारी रकम खर्च कर दी। आरोपी को कोर्ट में पेश किया, जहां से जेल भेज दिया गया।
ताज दिखाने से लेकर पार्किंग तक का लेते हैं ठेका
यह कोई पहला मामला नहीं है, जबकि किसी पर्यटक के साथ धोखाधड़ी हुई है। ताज के आसपास सक्रिय लपके पर्यटकों को झांसे में लेते हैं। ताज दिखाने से लेकर गाड़ी को खड़ी कराने का ठेका लेते हैं। टिकट भी बिना लाइन में लगे दिलाने का दावा करते हैं। लोगों के झांसे में आने पर होटल और एंपोरियम में ले जाते हैं। अधिक कीमत पर हर चीज उपलब्ध कराते हैं। कई बार पर्यटक को पता नहीं चल पाता है। पुलिस अभियान चला रही हैं, लेकिन कोई फायदा नहीं हो रहा है।