ज्योतिषाचार्य डॉ. अरविंद मिश्र ने बताया कि सूर्य के दक्षिणायन से उत्तरायण में आने और एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश को ही मकर संक्रांति कहते हैं। शास्त्राें के अनुसार उत्तरायण काल में सभी मांगलिक कार्य करना शुभ माना गया है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान कर सूर्य को अर्घ्य दिए जाने से पाप नष्ट होते हैं। तिल और सरसों के तेल के दान का विशेष महत्व है। महिलाएं अपने दीर्घ सौभाग्य के लिए माथे पर हल्दी, कुमकुम की बिंदी लगाकर चावल और मूंग की दाल मिश्रित खिचड़ी और तिल से बने लड्डू दान करती हैं।
ज्योतिषाचार्या डॉ. पूनम वार्ष्णेय ने कहा कि मकर संक्रांति पर्व पर स्नान, दान और धार्मिक कर्म प्रात: काल स्नान करने के उपरांत ही किए जाते हैं। अत: 15 जनवरी को सुबह स्नान करके भगवान शिव, माता पार्वती और श्रीगणेश की पूजा के बाद सूर्य भगवान को अर्घ्य देकर दान कर सकते हैं। इस बार 15 जनवरी को प्रात: काल 7 बजकर 31 मिनट से लेकर रात 3 बजकर 04 मिनट तक सर्वार्थ सिद्धि और अमृत सिद्धि योग रहेगा। इसके अलावा चतुर ग्रही योग और वृद्धि योग बन रहे हैं।