सूर्य का एक राशि से दूसरी राशि मे प्रवेश संक्रांति कहलाता है। आगामी 14 जनवरी को दोपहर 2 बजकर 28 मिनट पर सूर्य धनु से जैसे ही मकर राशि मे प्रवेश करेंगे वैसे ही पूरे देश मे मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाएगा। इस वर्ष मकर संक्रांति पर कुछ विशेष ज्योतिषीय योग-संयोग निर्मित हो रहे हैं। 14 जनवरी पौष शुक्ल द्वादशी को रवियोग मित्र, रोहिणी नक्षत्र, शुक्ल व ब्रह्म महायोग बन रहे हैं। उच्च राशि के चंद्रमा में पीले वस्त्र धारण किए हाथ में रजत पात्र लिए व्याघ्र पर सवार हो कुमारी अवस्था में गदा लिए संक्रांति का आगमन हो रहा है। पंचांगों ने 14 जनवरी को ही मकर संक्रांति का पर्व बताया है। कुछ पारंपरिक गणना आधारित पंचांग 15 जनवरी को भी ये पर्व बता रहे हैं।
पूरे दिन रहेगा पर्व
आचार्य पंडित रामचंद्र शर्मा वैदिक ने बताया कि 14 जनवरी को सूर्य दोपहर 2.28 बजे शनि की राशि मकर में प्रवेश कर रहे है। पुण्यकाल संक्रमण के 16 घटी पूर्व से माना जाता है। इसलिए संक्रांति का पुण्य प्रातः 8 बजकर 04 मिनट पर मनाया जाएगा। मकर संक्रांति से सूर्य उत्तरायण होंगे और देवताओं का प्रभात काल शुरू होगा। सूर्य का एक राशि से दूसरी राशि मे हुआ परिवर्तन अंधकार से प्रकाश की और हुआ परिवर्तन माना जाता है। मकर संक्रांति से दिन तिल तिल बढ़ेंगे तो रात छोटी होगी।
मंगल कार्यों का सिलसिला होगा शुरू
आचार्य शर्मा वैदिक ने बताया कि मकर संक्रांति से विवाह आदि मंगल कार्यों का सिलसिला भी शुरू हो जाएगा। संक्रांति मुख्य स्नान और दान पुण्य का पर्व है। इस दिन गंगा आदि पवित्र नदियों में स्नान करने और दान पुण्य करने का विशेष महत्व है। इस दिन किया गया दान सौ गुना होकर प्राप्त होता है। घी, कंबल के दान के साथ खिचड़ी और तिल से निर्मित पदार्थों के दान का विशेष महत्व है। ऐसी भी मान्यता है कि संगम पर इस दिन सभी देवी-देवता अपना स्वरूप बदलकर स्नान करने आते हैं। इसलिए इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने का विशेष धार्मिक महत्व है।
आचार्य शर्मा वैदिक ने बताया कि संक्रांति से देश दुनिया के भविष्य को भी टटोला जा सकता है। संक्रांति का वाहन व्याघ्र है अतः भय व चिन्ता का माहौल निर्मित होगा। वहीं शिक्षा के क्षेत्र में देश का मान बढ़ेगा। धर्म की राजनीति तेज होगी। विद्वानों व वेदपाठी ब्राह्मणों का वर्चस्व भी बढ़ेगा। आचार्य रामचन्द्र शर्मा वैदिक ने बताया कि संक्रांति को सुबह तिल से स्नान, तर्पण, तिल से हवन, तिल का दान व तिल व तिल से बने पदार्थो के भक्षण से वर्ष भर आरोग्य की प्राप्ति होती है।
आचार्य शर्मा वैदिक ने बताया कि सूर्य के मकर राशि प्रवेश से विभिन्न राशियों पर अलग अलग प्रभाव दिखाई देंगे। वृषभ, वृश्चिक, धनु व मीन के लिए शुभ होगा। मेष, तुला, सिंह व मिथुन के लिए अशुभ और शेष राशियों के जातकों को मिश्रित प्रभाव दिखाई देंगे। अशुभ प्रभाव से मुक्ति के लिए गंगाजल मिलाकर स्नान करें। तिल, गुड़ व खिचड़ी, लाल वस्त्र का दान करें और प्रातः सूर्य को अर्घ्य दें।