पूर्व माध्यमिक विद्यालय बरारा की शिक्षिकाएं सीमा और सुधा रानी ने बेसिक शिक्षा अधिकारी को दिए प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया है कि उनकी जानकारी और सहमति के बिना विषय परिवर्तन दर्शाया गया। सीमा का विषय हिंदी से सामाजिक विज्ञान तथा सुधा रानी का विषय अंग्रेजी से सामाजिक विज्ञान कर दिया गया। दोनों शिक्षिकाओं का कहना है कि उनके नाम से लगाए गए प्रार्थना पत्रों पर हस्ताक्षर उनके नहीं हैं। उनका आरोप है कि कनिष्ठ लिपिक पंकज सारस्वत ने उन्हें ऐसे प्रार्थना पत्र दिखाए गए, जिन पर फर्जी हस्ताक्षर किए गए थे। विभागीय जानकारी के अनुसार, समायोजन सूची तैयार करते समय बीआरसी बिचपुरी में तैनात कनिष्ठ लिपिक द्वारा आठ शिक्षकों के विषय बदल दिए गए। चूंकि मानव संपदा पोर्टल सचिव, बेसिक शिक्षा परिषद स्तर से लॉक था, इसलिए वहां कोई संशोधन नहीं हो सका।
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इसी कारण पोर्टल और समायोजन सूची के बीच अंतर सामने आ गया। संवाद इन आठ शिक्षकों के बदले विषय इस प्रकरण में जिन शिक्षकों के नाम सामने आए हैं, उनमें निधि गौतम, सुधा रानी, सीमा (पूर्व माध्यमिक विद्यालय बरारा), रचना बुलाटिया (पूर्व माध्यमिक विद्यालय खलौआ), महेंद्र सिंह बघेल (पूर्व माध्यमिक विद्यालय नगला बसुआ), आभा रानी जैन (पूर्व माध्यमिक विद्यालय मिढ़ाकुर-द्वितीय), अंजना वर्मा (पूर्व माध्यमिक विद्यालय नगला तलफी) तथा डॉ. कल्पना शर्मा (पूर्व माध्यमिक विद्यालय स्वामी) शामिल बताए गए हैं। बेसिक शिक्षा अधिकारी राकेश कुमार ने बताया कि प्रथम दृष्टया मामला गंभीर प्रतीत होने पर संबंधित कनिष्ठ लिपिक के निलंबन की संस्तुति कर दी गई है। पूरे प्रकरण की जांच कराई जा रही है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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अन्य ब्लॉकों में भी हो सकती है जांच
विभागीय सूत्रों का कहना है कि यदि जिले के सभी विकास खंडों की समायोजन सूची का मानव संपदा पोर्टल से मिलान कराया जाए तो इसी प्रकार की अन्य अनियमितताएं भी सामने आ सकती हैं। इससे समायोजन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे हैं। न्यायालय के आदेश पर चल रही प्रक्रिया शिक्षकविहीन और एकल शिक्षक वाले विद्यालयों में शिक्षकों की तैनाती के लिए माननीय उच्च न्यायालय के निर्देश पर समायोजन प्रक्रिया संचालित की जा रही है। ऐसे में यदि समायोजन से बचाने के उद्देश्य से विषय परिवर्तन किया गया है, तो यह पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है?
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