रठेरा में स्थापित टंकी जिसकी पानी की सप्लाई चल रही है बंद।
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मैनपुरी। जिले की 23 ग्राम पंचायतों में पिछले कई सालों से बंद पड़ी 22 पेयजल योजनाओं को दोबारा चालू करने की तैयारी शुरू हो गई है। पहले ग्राम पंचायतों के जिम्मे रही इन योजनाओं को अब जल निगम अपनी देखरेख में दुरुस्त करेगा।
करीब 10 साल पहले ग्राम पंचायतों में ओवरहेड टैंक, पानी सप्लाई के लिए पाइप लाइन आदि डालने का काम हुआ था। ये काम ग्राम पंचायतों को सौंपे गए थे। लेकिन, रखरखाव और धन की कमी के कारण वे धीरे-धीरे बंद हो गए, जिससे ग्रामीणों के घरों तक पानी पहुंचना बंद हो गया। लगातार मिल रही शिकायतों के बाद, शासन ने इन योजनाओं को फिर से शुरू करने का निर्णय लिया और इसकी जिम्मेदारी दोबारा जल निगम को सौंपी है।
अधिक खर्च के कारण पंचायतें नहीं करा पाईं काम
विभागीय अधिकारियों के अनुसार, इन बंद पड़ी पेयजल योजनाओं को दोबारा शुरू करने में प्रति ग्राम पंचायत 50 लाख से 1 करोड़ रुपये तक का भारी-भरकम खर्च आएगा। ग्राम पंचायतों के पास इतनी बड़ी धनराशि न होने के कारण वे इन योजनाओं को सुचारु नहीं कर पा रही थीं। यही वजह है कि 22 पेयजल योजनाएं सालों से ठप पड़ी हैं। अब जल निगम इन योजनाओं की मरम्मत और संचालन का जिम्मा संभालेगा। इसके लिए शासन से धनराशि स्वीकृत कराने हेतु प्रस्ताव मांगा गया है।
जयपुर की संस्था संभालेगी मरम्मत का काम
इन बंद पड़ी पेयजल योजनाओं को ठीक करने की जिम्मेदारी जयपुर की जीए इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड नाम की निजी संस्था को दी गई है। जल निगम के अधिकारियों के मुताबिक यह संस्था जल्द ही मरम्मत का काम शुरू कर देगी, जिससे ग्रामीणों के घरों तक स्वच्छ पानी की आपूर्ति फिर से शुरू हो सकेगी। सहायक अभियंता जल निगम, रोहितेंद्र कुमार ने बताया कि पंचायतों के अधीन जिले की 23 ग्राम पंचायतों में 22 पेयजल योजनाएं बंद पड़ी हैं। इनको शुरू कराने के प्रयास शुरू कर दिए गए हैं। जयपुर की एक निजी संस्था को इसकी जिम्मेदारी दी गई है।