मैनपुरी। गांव के मरीजों को गांव में ही बेहतर उपचार मिल सके, इस उद्देश्य से जिले भर में 50 नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर लोग दवा लेने जाते हैं तो यहां या तो फार्मासिस्ट मिलता है या फिर एएनएम। इसके चलते मरीजों को उचित उपचार नहीं मिल पाता। 15 साल पहले जिले में लोगों को गांव में ही बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिलने के उद्देश्य से जिले में 50 नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की स्थापना कराई गई थी। 50 नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में से 37 पर डॉक्टर की तैनाती 15 साल बाद भी नहीं की गई है। फार्मासिस्ट, वार्ड बॉय और एएनएम ही उनके डॉक्टर हैं। फार्मासिस्ट की बात की जाए तो करीब 20 अस्पतालों में फार्मासिस्ट तक की तैनाती नहीं है। ऐसे में एएनएम और वार्ड बॉय ही यहां दवा वितरित करते देखे जाते हैं।
जरूरी जांच तक की व्यवस्था नहीं
नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का हाल ये है कि यहां जरूरी जांच तक की व्यवस्था नहीं है। यूरिन और ब्लड की पर्याप्त जांच की व्यवस्था न होने के कारण लोगों को या तो सीएचसी पर जाना पड़ता है या फिर जिला अस्पताल की शरण लेनी पड़ती है।
झोलाछाप से उपचार कराने को मजबूर हैं लोग
एक तरफ शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि कोई भी मरीज झोलाछाप से उपचार न ले दूसरी तरफ सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी के कारण मरीजों के लिए झोलाछाप ही एक सहारा हैं। नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर डॉक्टर न होने के कारण मरीज झोलाछापों से ही उपचार ले रहे हैं।
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एनआरएचएम के तहत लगातार डॉक्टरों की व्यवस्था की जा रही है। सीएचसी स्तर पर डॉक्टर उपलब्ध हैं। सरकार की तरफ से प्रयास भी किए जा रहे हैं जल्द ही सभी जगह डॉक्टर की तैनाती होगी।
डॉ. आरसी गुप्ता, सीएमओ