मैनपुरी। ट्रांसपोर्ट नगर स्थित सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट वर्षों से बंद पड़ा है। यह प्लांट खुद ही कबाड़ में तब्दील हो गया है। यह हाल तब है जब खुद डीएम अंजनी कुमार सिंह ने संज्ञान लेते हुए मौके पर जाकर 28 फरवरी 2025 को स्थिति देखी थी। उन्होंने पाया था कि कूड़े का उचित ढंग से निस्तारण नहीं किया जा रहा है। लंबे अरसे से प्लांट का संचालन न होने के कारण प्लांट के आस-पास कूड़े के ढेर लगे हुए हैं।
डीएम अंजनी कुमार सिंह ने अधिशासी अधिकारी नगर पालिका बुद्धि प्रकाश को आदेश दिया था कि आउटसोर्सिंग के माध्यम से थर्ड पार्टी के जरिये सॉलिड बेस्ट प्लांट का संचालन कराया जाए। इसके लिए पूरी कार्ययोजना बनाकर उनके समक्ष पेश की जाए। मगर, जिम्मेदारों की लापरवाही का आलम यह है कि डीएम के आदेश को भी हवा में उड़ा दिया।
2015 में तीन करोड़ की लागत से बना था प्लांट
वर्ष 2015 में ट्रांसपोर्ट नगर में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट की स्थापना कराई गई थी। यहां तीन करोड़ की लागत से निर्माण व मशीनों की स्थापना कराई गई थी। 2016 में लखनऊ की संस्था एक्वायर्ड हाइड्रो एयर लिमिटेड से 30 साल का अनुबंध किया गया था। इसमें 40 टन कचरा प्रतिदिन निस्तारित करने की बात तय हुई थी। संस्था ने पांच साल में ही प्लांट को बंद कर दिया।
यहां लगे हैं कूड़े के ढेर
सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट ट्रांसपोर्ट नगर के पास कूड़े के ढेर लगे हुए हैं। प्लांट बंद होने से जेल के पास शहर से निकलने वाला कूड़ा डाला जा रहा है। वहीं, संसारपुर के पास नया डलाबघर बना रखा है। ईशन नदी के किनारे कूड़ा डाला जा रहा है, जो नदी को भी दूषित कर रहा है। हर दिन के साथ ही शहर के आसपास गंदगी बढ़ती जा रही है।
क्षमता कम, कूड़ा ज्यादा
नगर पालिका को हस्तांतरित किए गए इस प्लांट की क्षमता स्थापना के समय महज तीस टन थी। जबकि शहर में अब प्रतिदिन लगभग 60 टन कूड़ा निकल रहा है। अधिक कूड़ा निकलने से उसके निस्तारण की समस्या आई तो शहर में जगह-जगह कूड़ा डंप किया जाने लगा है। प्लांट के पास उप निदेशक कृषि व भूमि संरक्षण कार्यालय भी बने हैं। कर्मचारियों को कचरे के सड़ने से उठने वाली दुर्गंध के बीच काम करना भी बारिश के दिनों में मुश्किल हो जाता है।
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अमर उजाला ने चेताया था, नहीं जागे जिम्मेदार और गिरा दी रैंकिंग
गंदगी-कूड़ा निस्तारण न होने पर खबरें प्रकाशित लापरवाही की ओर खींचा था ध्यान
संवाद न्यूज एजेंसी
मैनपुरी। स्वच्छता सर्वेक्षण 2024-25 में मैनपुरी नगर पालिका की प्रदेश स्तरीय रैंकिंग में 71 पायदान की शर्मनाक गिरावट कोई आकस्मिक नहीं है। बल्कि यह अमर उजाला की ओर से प्रकाशित की गई खबरों की अनदेखी का सीधा परिणाम है। जिम्मेदार अधिकारियों ने गंभीरता से नहीं लिया, जिसका खामियाजा अब शहर की गिरी हुई रैंकिंग के रूप में सामने आया है।
अमर उजाला ने अपनी विभिन्न रिपोर्टों में शहर में पसरी गंदगी, जगह-जगह लगे कूड़े के ढेर और बदहाल कूड़ा निस्तारण व्यवस्था पर बार-बार ध्यान खींचा था। इन खबरों के माध्यम से नगर पालिका प्रशासन की लापरवाही को उजागर किया गया था और उन्हें समय रहते स्थिति सुधारने की चेतावनी भी दी गई थी। ये चेतावनियां केवल पत्रकारिता का धर्म नहीं थीं, बल्कि शहर के नागरिकों के स्वास्थ्य और स्वच्छता के प्रति गहरी चिंता भी थीं।