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Agra News: ट्रेडिंग ग्रुप से मुनाफे का झांसा...ठगों ने खाते में जमा कराए 88.99 लाख

Thu, 27 Aug 2026 02:38 AM IST
आगरा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
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agra police - फोटो : अमर उजाला
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आगरा। हमारी कंपनी सेबी (भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड) से पंजीकृत है। 1,2, 5, 10 नहीं आपको कई गुना मुनाफा होगा। एक बार रकम लगाकर देखो...। शेयर ट्रेडिंग नाम से ग्रुप। निशा वर्मा नाम से व्हाट्सएप पर चैटिंग। कुछ इसी अंदाज में साइबर ठगों ने आर्किटेक्ट यशवीर सिंह को ठगी का शिकार बनाया। 10 बार में 88.99 लाख रुपये एक ही बैंक के खाते में जमा करा लिए। ठगी का पता चलते ही पीड़ित ने साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
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पीड़ित यशवीर सिंह भागीरथी देवी मार्ग, खंदारी के रहने वाले हैं। उन्होंने बताया कि 10 जुलाई को उन्हें एक व्हाट्सएप ग्रुप से जोड़ा गया। इसका नाम 328वेल्थ पाइनीयर इनवेस्टमेंट ग्रुप था। ग्रुप से जोड़ने के लिए कोई अनुमति नहीं ली गई। ग्रुप को चेक किया तो उसमें 152 सदस्य थे। इसमें निवेश के नाम पर ट्रेडिंग की जा रही थी। निशा वर्मा के नाम से बनी सदस्य सभी को लीड करती थी। निवेश से होने वाले मुनाफे के बारे में चैटिंग के माध्यम से बताती थी। कई गुना मुनाफा दिखाया गया। यह भी कहा कि कंपनी एचडीएफसी सिक्योरिटी डीएमए मार्केट पूरी तरह से पंजीकृत है। इससे वो लालच में आ गए। 13 अगस्त से 17 अगस्त के बीच 10 बार में रकम जमा कर दी। यह रकम एक एप में दिख भी रहे थे।
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खाते में नहीं आई रकम
पीड़ित ने बताया कि जब वो एप में मिलने वाली रकम को अपने खाते में ट्रांसफर करने का प्रयास करते थे तो वो आती नहीं थी। इस बारे में ग्रुप पर निशा वर्मा से बात की। मगर वो कहने लगी कि अभी और रकम जमा करनी होगी। इससे शक हो गया। सेबी से पता चला कि संस्था फर्जी है। इस पर एनसीआरपी पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई।

सावधानी से होगा बचाव
डीसीपी आदित्य सिंह ने बताया कि किसी फर्जी प्रलोभन में नहीं आना चाहिए। किसी ग्रुप में जुड़े भी जाएं तो उसे तुरंत डिलीट कर देना चाहिए। ग्रुप पर दिखने वाले सदस्य साइबर अपराधी हो सकते हैं। सावधानी से ही बचाव संभव है। किसी तरह की ठगी होने पर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।
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वर्जन
एक खाते में रकम जमा कराई गई है। इसकी जानकारी जुटाई जा रही है। खाता कहां और किसने बनाया। पीड़ित की शिकायत पर आईटी एक्ट की धारा में प्राथमिकी दर्ज की है। - आदित्य सिंह, डीसीपी साइबर क्राइम
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