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Agra News: फेफड़ों में भरा धुआं, अस्थमा अटैक के पांच मरीज भर्ती

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आगरा। पटाखों और वाहनों के धुएं से वायु प्रदूषण बढ़ रहा है। लोगों को गले में खराश, सीने में जकड़न, खांसी की परेशानी हो रही है। सबसे ज्यादा अस्थमा और सांस रोगियों को दिक्कत हो रही है। फेफड़ों में धूल-धुआं भरने से पांच लोगों को अस्थमा अटैक आया। उनका इलाज एसएन मेडिकल कॉलेज में चल रहा है।
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एसएन के वक्ष एवं क्षय रोग विभागाध्यक्ष डॉ. संतोष कुमार ने बताया कि पटाखों और जाम में वाहन फंसने से धूल-धुआं का स्तर हवा में बढ़ गया है। इनमें खतरनाक तत्व होने के कारण सांस नलिकाओं और फेफड़ों में संक्रमण हो रहा है। इसके कारण अस्थमा और सांस रोगियों की सांस उखड़ रही है।
बृहस्पतिवार को भी अस्थमा अटैक के पांच मरीज भर्ती हुए हैं। इनका वक्ष एवं क्षय रोग विभाग में इलाज चल रहा है। ऑक्सीजन भी दे रहे हैं। दो की हालत ज्यादा खराब है। ओपीडी में आए मरीजों ने छाती में भारीपन, खांसी और बुखार की परेशानी बताई।
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ईएनटी रोग विभागाध्यक्ष डॉ. रीतू गुप्ता ने बताया कि मौसम बदलने और प्रदूषण के कारण गले में संक्रमण तेजी से बढ़ा है। गले में सूजन, दर्द, खराश के साथ आवाज भारी हो रही है। नाक की एलर्जी से बार-बार छींक आना, सिर में दर्द और थकान हो रही है। तेज पटाखों से कान में परेशानी के भी मरीज आ रहे हैं। इनमें सबसे ज्यादा बच्चे हैं।
वहीं बर्न यूनिट प्रभारी डॉ. दीपशिखा ने बताया कि पटाखों से जले हुए मरीजों की संख्या अब कम हो गई है। बृहस्पतिवार को तीन मरीज आए। पटाखे चलाते वक्त हाथ और छाती आंशिक रूप से जल गए थे। इनकी ड्रेसिंग कर डिस्चार्ज कर दिया गया। तीन दिन में जले हुए 31 मरीज बर्न यूनिट में इलाज के लिए आए।
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इन बातों का रखें ध्यान:
- कचरा न जलाएं, प्रदूषित स्थानों पर जाने से बचें, मास्क लगाएं।
- जिनके घर सड़क किनारे हैं वो दरवाजा और खिड़की पर पर्दे लगाएं।
- अस्थमा-सांस रोगी दवाएं बंद न करें, डॉक्टर से डोज बढ़वाएं।
- ठंडी सामग्री खाने-पीने से बचें, सीने में जकड़न पर भाप लें।
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