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‘अंतर्वेद’ में पिछड़ों का भरोसा जीतने की जंग, प्रसपा भी वोट काटने के लिए बैठी है तैयार

Wed, 01 May 2019 05:28 AM IST
देव कश्यप चंद्र प्रकाश सिंह, अमर उजाला, फतेहपुर
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साध्वी निरंजन ज्योति (भाजपा) राकेश सचान (कांग्रेस) और सुखदेव प्रसाद वर्मा (गठबंधन) - फोटो : अमर उजाला
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जिले में लोकसभा चुनाव इस बार दिलचस्प मोड़ पर है। पिछली बार पौने तीन लाख से अधिक वोट पाने वाले को भी हार नसीब हुई थी। समीकरण इस बार कुछ जुदा है। मतदान नजदीक आने के साथ मुकाबला त्रिकोणीय व कांटेदार होता जा रहा है। प्रगतिशील समाजवादी पार्टी भी काफी वोट काटने की तैयारी में जुटी है। बहरहाल जीते कोई भी, सांसद पिछड़ा वर्ग से ही होने की उम्मीद है।

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पौराणिक ग्रंथों में फतेहपुर काे अंतर्वेद  कहा गया है। पर, तमाम ऐतिहासिक व धार्मिक विरासत संजोने के बाद भी यह जिला अति पिछड़ा है। मोदी सरकार ने इसे अति पिछड़ा जिला घोषित कर प्रोजेक्ट में आकांक्षी जनपद नाम दिया था। पिछड़ेपन के लिए लोग नेताओं और जिला प्रशासन दोनों को कठघरे में खड़ा करते हैं। 29 लाख की आबादी वाले जिले में जिला मुख्यालय स्तर पर भी सीवर लाइन नहीं है। नगर पंचायतों की बात तो बहुत दूर है। औद्योगिक इकाइयां धड़ाम हैं। हर साल खत्म होते तालाब, सूखे खेत, जर्जर बिजली-व्यवस्था में बर्बाद फसल, खांदी से लबालब होते खेत व अन्ना मवेशी किसान के लिए कहर से कम नहीं हैं। सपा शासन काल में 2013 में बना ट्राॅमा सेंटर आज भी रेफरल यूनिट से ज्यादा कुछ नहीं। 

लोकसभा चुनाव में भाजपा से साध्वी निरंजन ज्योति, कांग्रेस से राकेश सचान, गठबंधन से बसपा के सुखदेव प्रसाद वर्मा, प्रसपा से महेश चंद्र साहू, विकास इंसाफ पार्टी से राष्ट्रीय अध्यक्ष राजकुमार लोधी, कामता प्रसाद द्विवेदी, अशोक कुमार, रामकुमार, बेनी प्रसाद व जुबैर अहमद दस प्रत्याशी मैदान में हैं। निवर्तमान सांसद व केंद्रीय राज्यमंत्री साध्वी लगातार दूसरी बार उतरी हैं। राकेश सपा के पूर्व सांसद रहे हैं, इस बार टिकट न मिलने से कांग्रेस प्रत्याशी हैं। यह इनका तीसरा चुनाव है, जिसमें एक बार जीते व एक बार हारे हैं।

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सुखदेव प्रसाद वर्मा बिंदकी विधानसभा से लगातार दो बार विधायक रह चुके हैं। पहली बार सांसद का चुनाव लड़ रहे हैं। आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 1996 में जिले के सांसद बसपा के विश्वंभर प्रसाद निषाद बने, इसके बाद यह कुर्सी पिछड़ा वर्ग के हाथ में आई और फिर अभी तक यथावत है। यह जरूर है कि इस कुर्सी पर बैठने वाले पिछड़ा वर्ग नेता कभी सपा, कभी बसपा व कभी भाजपा से चुने गए। कुर्सी निषाद, पटेल व सचान के बीच ही रही।

टूटी आशाएं
पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह के समय हवाईअड्डा व सीवर लाइन का प्रोजेक्ट बना था। बजट आने के बाद लौट गया। पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के बेटे हरिकृष्ण शास्त्री ने छिवली से नउवाबाग को औद्योगिक क्षेत्र घोषित कराया। वीपी सिंह के कार्यकाल के बाद से ऐसा ग्रहण लगा कि उद्योग बंद हो गए।

नई आशाएं 
मेडिकल काॅलेज का निर्माण, केंद्रीय विद्यालय का संचालन, रेल पार्क का प्रस्तावित मसौदा, घरों में पीएनजी सप्लाई, सीएनजी पंप का निर्माण।

सांसद को पीएम बनाने तक का है तमगा
इलाहाबाद के राजा मांडा विश्वनाथ प्रताप सिंह यहीं से चुनाव जीतकर प्रधानमंत्री बने थे। पूर्व पीएम लाल बहादुर शास्त्री के बेटे हरिकृष्ण शास्त्री वाराणसी से यहां चुनाव लड़ने आए तो जनता ने उन्हें दो बार लगातार संसद भेजा। वह कैबिनेट मंत्री भी बने। यहां छह बार कांग्रेस, जनता पार्टी, जनता दल, बसपा व भाजपा सहयोगी दल दो-दो बार, भाजपा, सपा और निर्दलीय एक-एक बार चुनाव जीत चुके हैं। 
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