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UP Election Result 2024: एटा 10 साल बाद बना विपक्ष का हिस्सेदार, नए सांसद के लिए ये रहेगी बड़ी चुनौती

Mon, 10 Jun 2024 11:18 AM IST
धीरेन्द्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, एटा

सार

लोकसभा चुनाव 2024 में एटा की जनता ने सपा प्रत्याशी देवेश शाक्य को सांसद के रूप में चुना है। ऐसे में अब विपक्ष में रहते हुए सपा सांसद जिले को किस तरह विकास योजनाओं का लाभ दिलाएंगे, ये उनके सामने बड़ी चुनौती है। 
 
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अखिलेश और डिंपल के साथ एटा के सांसद - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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लोकसभा में 10 साल बाद एटा विपक्ष का हिस्सेदार बना है। इससे पहले दो कार्यकाल में भाजपा के सांसद राजवीर सिंह यहां का प्रतिनिधित्व लोकसभा में करते रहे। इस दरम्यान एटा सत्ता पक्ष का हिस्सा बनकर रहा था।
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लंबे समय बाद 2014 में एटा को केंद्र सरकार में हिस्सेदारी का मौका मिला था। उस चुनाव में जहां केंद्र में प्रचंड बहुमत के साथ मोदी सरकार बनी, तो एटा लोकसभा सीट पर भाजपा के राजवीर सिंह चुनाव जीते। इससे पहले 2009 में यूपीए सरकार बनी थी। उस कार्यकाल में निर्दलीय कल्याण सिंह एटा से सांसद चुने गए थे। ऐसे में एटा के सांसद सत्ता से दूर रहे। 2004 और उससे पहले 1999 में सपा के देवेंद्र सिंह यादव चुनाव जीतकर एटा सांसद बने थे, लेकिन 2004 में यूपीए और 1999 में एनडीए की सरकार बनी थी। इसमें सपा की कोई भागीदारी नहीं रही थी।

 

1998 में भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार केंद्र में बनी, तो एटा सीट पर भाजपा के महादीपक सिंह शाक्य सांसद रहे थे। इससे पहले 1996 में 16 दिन की भाजपा सरकार के समय भी एटा पर महादीपक सिंह शाक्य सांसद थे। लंबे समय बाद एटा को सरकार में हिस्सेदारी मिली तो इस बार बदलाव के चुनाव में इससे दूरी हासिल हुई है।





 

कांग्रेस सरकार में मिलता रहा प्रतिनिधित्व
शुरूआती दौर में कांग्रेस की सरकारें बनीं तो लोकसभा में एटा को भी प्रतिनिधित्व मिलता रहा। 1951-52, 1957, 1971 और 1980 में बनी कांग्रेस सरकार के समय एटा में रोहनलाल चतुर्वेदी और मलिक मोहम्मद मुशीर खान सांसद रहे थे।


 
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देवेश शाक्य के लिए चुनौतियां भी कम नहीं
राजवीर सिंह को 10 साल के कार्यकाल में सबसे मुफीद हालात यह मिले थे कि उनके ही दल की केंद्र में सरकार थी। ऐसे में उनकी कई बातें सरकार तक पहुंचीं और जनता को उनका लाभ भी मिला। जनता ने इस बार काफी उम्मीदों से सपा के देवेश शाक्य को जिताया है, लेकिन उनके लिए चुनौतियां कम नहीं हैं। केंद्र में एनडीए की सरकार है, जिसकी सपा कड़ी विरोधी है। ऐसे में वह किस प्रकार सरकार से तालमेल बैठाकर एटा को सरकारी योजनाओं का लाभ दिला पाएंगे, यह देखने वाली बात होगी।
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