एटा लोकसभा सीट पर अब तक बसपा ने सात चुनाव लड़े हैं। हर बार नया प्रत्याशी खड़ा किया। लेकिन सफलता अभी तक हाथ नहीं लग सकी है। अधिकांश चुनावों में मुख्य रूप से इस सीट पर भाजपा और सपा के बीच ही मुकाबला होता रहा है। पिछले चुनाव में सपा से गठबंधन कर पार्टी ने इस सीट पर प्रत्याशी नहीं उतारा था। लेकिन इस बार पार्टी सुप्रीमाे मायावती गठबंधन से स्पष्ट इन्कार कर चुकी हैं। ऐसे में तय माना जा रहा है कि बसपा यहां भी मजबूत प्रत्याशी को उतारेगी।
स्थानीय स्तर से टिकट के लिए नौ आवेदन पार्टी मुख्यालय भेजे गए हैं। इनमें सबसे अधिक दावेदार यादव वर्ग से तीन हैं। वहीं दो मुस्लिम दावेदार भी हैं। इनमें से किसी दावेदार को टिकट मिलता है तो यह सपा के लिए बड़ा झटका हो सकता है। दोनों ही वर्ग सपा के बेस वोट बैंक कहे जाते हैं। बसपा का सजातीय प्रत्याशी होने पर बिखराव होने की संभावना निश्चित रूप से बनेगी।
वहीं दो आवेदन क्षत्रिय, एक ब्राह्मण वर्ग का भी है। इनमें से कोई प्रत्याशी घोषित होता है तो भाजपा के लिए घाटे की बात हो सकती है। क्योंकि लोधी के बाद भाजपा के वोट बैंक में सवर्ण मतदाता गिने जाते हैं। यदि क्षत्रिय या ब्राह्मण प्रत्याशी आता है तो वोटों का बंटवारा होगा। जिसका खामियाजा भाजपा को ही उठाना पड़ेगा। इनके अलावा एक आवेदन शाक्य प्रत्याशी का भी है। पूर्व के चुनावों में शाक्य मतदाता भाजपा के पक्ष में ही मतदान करते रहे हैं।
इस बार सपा ने शाक्य प्रत्याशी उतारा है। ऐसे में दोनों ही पार्टियां शाक्य मतदाताओं को अपने पाले में खींचने के लिए जोर-आजमाइश कर रहे हैं। बसपा से भी शाक्य प्रत्याशी मैदान में उतरता है तो यह विभाजन तीन जगह होगा और भाजपा के साथ सपा को भी खामियाजा उठाना पड़ेगा। बसपा जिलाध्यक्ष बलवीर भास्कर का कहना है कि जिले से नौ आवेदन भेजे गए हैं। जिन पर मंथन लगभग हो चुका है। एक-दो दिन में प्रत्याशियों की घोषणा हाेने वाली है।