समाजवादी पार्टी से बगावत कर प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) बनाने वाले यूपी के कद्दावर नेता शिवपाल यादव इस चुनाव में कोई करिश्मा नहीं दिखा पाए। शिवपाल सिंह मुख्य मुकाबले में भी नहीं आ पाए और तीसरे नंबर पर रहे। लोकसभा में पहुंचने का उनका सपना अधूरा रह गया।
समाजवादी पार्टी से नाराज शिवपाल यादव ने चुनाव लड़ने के लिए फिरोजाबाद को रणनीति के तहत चुना था। फिरोजाबाद संसदीय क्षेत्र में यादव मतदाताओं की संख्या अधिक होने के कारण भी उन्होंने यहां से चुनाव लड़ने का फैसला लिया था। शिवपाल की कोशिश सपा के गढ़ में सपा को घेरने की थी।
उनकी इस कोशिश को धार देने की रणनीति सपा से बगावत करने वाले सपा के मुख्य नेताओं ने दी थी। इसमें मुख्य भूमिका में सिरसागंज के सपा विधायक हरिओम यादव, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष विजय प्रताप यादव छोटू और पूर्व विधायक अजीम भाई की थी। अंदरखाने जसराना क्षेत्र में भी सपा में रहे एक मुख्य नेता शिवपाल यादव के साथ खड़े हो गए।
शिवपाल यहां पूरी रणनीति के तहत चुनाव लड़ने आए थे। लखनऊ की रैली में स्थानीय सपा नेताओं ने शिवपाल को फिरोजाबाद से चुनाव लड़ने का प्रस्ताव रखा था और शिकोहाबाद के रामलीला मैदान में बड़ी रैली करके शिवपाल ने फिरोजाबाद से चुनाव लड़ने की घोषणा की थी। शिवपाल यादव ने फरवरी माह से चुनाव प्रचार शुरू किया था।
उनकी नजर यादव वोट के साथ-साथ मुस्लिम और भाजपा के वोट बैंक पर थी। भाजपा ने जिस तरह से प्रत्याशी की घोषणा काफी देर से की और साधारण कार्यकर्ता को टिकट दिया उससे शिवपाल समर्थक दूसरा गणित लगाए बैठे थे। शिवपाल समर्थक सोच रहे थे इसका लाभ उन्हें मिलेगा और भाजपा का कुछ वोट उन्हें शिफ्ट हो जाएगा लेकिन ऐसा हुआ नहीं।
शिवपाल ही नहीं उनके रणनीतिकारों की रणनीति भी फेल हो गई। शिवपाल यादव मुख्य मुकाबले से ही बाहर हो गए। मुकाबला सपा और भाजपा के बीच हुआ। शिवपाल तीसरे नंबर पर पहुंच गए।
इस सीट को जीत कर शिवपाल यूपी की राजनीति में जो संदेश देने की कोशिश कर रहे थे, हार से उन्हें झटका लगा है। जानकारों का मानना है कि शिवपाल सिंह यादव ने यहां अक्षय यादव का वोट बिगाड़ दिया। जो 91 हजार वोट उन्हें मिले यदि शिवपाल यहां से नहीं लड़ते तो ये वोट समाजवादी पार्टी खेमे में जा सकते थे।
बुधवार को शिवपाल यादव शिकोहाबाद आए थे और मतगणना अभिकर्ताओं की बैठक में उन्होंने दावा किया था कि वह फिरोजाबाद सीट जीतेंगे और उनके बिना केंद्र में कोई सरकार नहीं बनेगी।