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Agra News: आम के वृक्षों में चूने के उपाय से मिलेगी गुणवत्तापूर्ण बेहतर पैदावार

Mon, 24 Nov 2025 11:35 PM IST
आगरा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
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फोटो01डॉ. अंकित सिंह भदौरिया, कृषि वैज्ञानिक, ।स्रोत:स्वयं
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कासगंज। आम के पेड़ों पर सफेदी लगाना एक प्राचीन पारंपरिक कृषि तकनीक है। चूने के घोल को वृक्ष के तने पर लगाने से न सिर्फ हानिकारक कीटों से बचाव होता है बल्कि गुणवत्तापूर्ण बेहतर पैदावार में भी सहायक होता है।
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कृषि विज्ञान केंद्र मोहनपुरा के कृषि वैज्ञानिक डॉ. अंकित सिंह भदौरिया ने बताया कि 10 लीटर पानी में 1 किलोग्राम बुझा हुआ चूना और 200 ग्राम कॉपर सल्फेट मिलाकर बनाए गए घोल को पेड़ के तने पर जमीन से 4 से 5 फुट ऊंचाई तक ब्रश की सहायता से अच्छी तरह लगाना चाहिए। यह कार्य सर्दी की शुरुआत में अक्टूबर से नवंबर महीने में करनी चाहिए। क्योंकि इस समय पेड़ों की वृद्धि बेहद धीमी होती है। दूसरी बार फरवरी से मार्च महीने में सफेदी लगाने से पेड़ को तेज गर्मी से बचाने में मदद मिलती है। सफेदी लगाने के बाद नियमित निरीक्षण भी आवश्यक है। चूना हल्का होने पर पुनः लगा सकते हैं। उन्होंने बताया कि सफेदी का लेप दीमक एवं अन्य छाल खाने वाले हानिकारक कीटों से बचाव करता है। साथ ही क्षारीय गुण होने के कारण फफूंद एवं अन्य बीमारियों को पनपने से रोकता है। साथ ही पेड़ों को तनाव से बचाने में मदद मिलती है जिससे पेड़ अधिक बौर और फल देते हैं। गर्मियों में सफेद रंग होने के कारण सूर्य के प्रकाश को परावर्तित कर तामपान नियंत्रण एवं नमी बनाए रखने में सहायक होता है। इसके अतिरिक्त आम की अच्छी फसल के लिए फूल आने से 10 से 15 दिन पहले सूक्ष्म पोषक तत्वों का छिड़काव एक लीटर पानी में 5 ग्राम बोरिक एसिड और जिंक सल्फेट को घोलकर छिड़काव करने से फूल और फल की मात्रा एवं गुणवत्ता में काफी सुधार होता है।
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