आगरा में दहेज के लिए जिस विवाहिता को जिंदा जला दिया गया, उसकी मौत के 7 साल बाद इंसाफ मिला है। दोषी पति के साथ सास और ननद को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है।
आगरा में दहेज हत्या व अन्य आरोपों में अदालत ने थाना चित्राहाट क्षेत्र के गांव शाहपुर ब्राह्मण निवासी मृतका के पति जुगल किशोर, सास ईश्वरी देवी और ननद रेखा उर्फ सुहागवती को दोषी पाया। एडीजे-9 विवेक कुमार ने सश्रम उम्रकैद के साथ 10-10 हजार रुपये का जुर्माना अदा करने की सजा सुनाई है।
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थाना चित्राहाट में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार थाना मनसुखपुरा क्षेत्र के गांव बसई गूजर निवासी अशोक कुमार ने 13 मई 2019 को तहरीर दी थी। आरोप लगाया था कि उन्होंने अपनी 22 वर्षीय पुत्री कल्पना की शादी 22 जून 2018 को शाहपुर ब्राह्मण निवासी जुगल किशोर के साथ की थी। शादी के कुछ समय बाद से ही पुत्री का पति जुगल किशोर, सास ईश्वर देवी उर्फ ईश्वरी देवी, ननद रेखा अतिरिक्त दहेज की मांग को लेकर परेशान करने लगे।
विरोध पर मारपीट कर कमरे में बंद कर देते। 3 अप्रैल 2019 को पुत्री की ससुराल से फोन आया कि दहेज की मांग पूरी न होने पर मिट्टी का तेल डाल कर जला दिया। वह परिजन के साथ मौके पर पहुंचे। पुत्री कल्पना जली हुई थी। उसे गंभीर हालत में इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया। पुत्री कल्पना ने बताया कि मुझे मेरे पति ने चाय बनाने के बहाने रसोई में भेजा था। पीछे से पति ने हाथ पीछे बांधकर पटक दिया। ननद रेखा ने मिट्टी का तेल डाल दिया। सास ईश्वरी देवी ने हाथ पकड़ लिए। पति ने जान से मारने की नीयत से रसोई की बाहर से कुंडी बंद कर आग लगा दी। 12 मई को इलाज के दौरान पुत्री की मौत हो गई।