राजा मंडी बाजार स्थित विवादित लाभचंद मार्केट में मंगलवार को पुलिस और पीएसी के साये में तीन घंटे सड़क की तलाश की गई। एक-एक इंच जमीन नापी गई। एमजी रोड से आगरा कॉलेज चहारदीवारी तक सरकारी रिकॉर्ड के आधार पर संयुक्त टीम ने नापजोख की।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जिलाधिकारी अरविंद बंगारी ने राजस्व और नगर निगम की संयुक्त जांच टीम बनाई थी। मंगलवार सुबह 11 बजे एडीएम नागरिक आपूर्ति अजय नारायण, एडीएम प्रोटोकॉल एवं नजूल प्रभारी प्रशांत तिवारी, एसडीएम सदर सचिन राजपूत, सहायक नगरायुक्त श्रद्धा पांडेय के साथ 25 से अधिक लोगों की टीम राजा मंडी बाजार पहुंची। एमजी रोड से टीम ने हाथों में फीता, सजरा प्लान एवं उपकरण से पैमाइश शुरू की। आगरा कॉलेज की बाउंड्री से लेकर एमजी रोड तक नापी गई। सरकारी नक्शों से मिलान किए। पूरी जांच कागजों में दर्ज सड़क की तलाश पर केंद्रित रही। जांच में टीम को प्रथम दृष्ट्या अवैध निर्माण और अतिक्रमण मिला है।
ये है विवाद की जड़
लालचंद मार्केट में पट्टा धारकों और दुकानदारों के बीच लंबे समय से खींचतान चल रही है। मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। विवादित भूमि का हिस्सा सड़क है या नहीं? कोर्ट ने इसी सत्यता की जांच के लिए मंगलवार का दिन मुकर्रर किया था। विवाद की जड़ पट्टाधारक द्वारा दुकानों को किराए पर चढ़ाना माना जा रहा है। पट्टाधारक को यह भूमि निजी उपयोग के लिए दी गई थी।
सड़क या बाजार... रिपोर्ट तय करेगी भविष्य
प्रशासन की जांच रिपोर्ट पर ही अब सबकी निगाहें टिकी हैं। यदि पैमाइश में यह जमीन सड़क के रूप में दर्ज पाई जाती है, तो मार्केट के मौजूदा स्वरूप पर बड़ा संकट आ सकता है। कोर्ट सड़क पर अतिक्रमण हटाने के आदेश कर चुका है। पैमाइश के दौरान व्यापारियों में सुगबुगाहट रही।
निर्माण से पहले ली थीं अनुमतियां
लाभचंद मार्केट के पट्टाधारक प्रदीप जैन ने बताया कि नगर पालिका से पट्टे का उस समय डेढ़ गुना राशि से भुगतान हुआ था। भवनों के निर्माण और उपयोग से संबंधित स्वीकृतियां नगर पालिका से प्राप्त की गई थीं। इस संबंध में सभी देय कर नगर पालिका 1947 से वसूल करती आ रही है।