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चंबल के बीहड़ में तेंदुए की मौत: शरीर पर नहीं मिले चोट के निशान, संक्रमण या बीमारी से मरने का अंदेशा

Mon, 03 Jan 2022 10:18 PM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, आगरा

सार

बीहड़ में रविवार को तेंदुए ने एक किसान पर हमला भी बोला था। सोमवार को एक तेंदुआ मरा मिला। उसके शरीर पर चोट के निशान नहीं है। डीएफओ ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट से ही मौत की वजह स्पष्ट हो सकेगी। 
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बीहड़ में मृत मिला तेंदुआ - फोटो : अमर उजाला
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आगरा जनपद के बाह क्षेत्र में चंबल के बीहड़ में सोमवार को एक तेंदुआ मृत मिला। वाइल्डलाइफ एसओएस की टीम के साथ राष्ट्रीय चंबल सेंक्चुरी प्रोजेक्ट के डीएफओ दिवाकर श्रीवास्तव मौके पर पहुंचे। तेंदुए के शरीर पर चोट के निशान नहीं मिले हैं। वन्य जीव अधिकारियों ने संक्रमण या बीमारी से तेंदुए की मौत का अंदेशा जताया है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) बरेली भेजा गया है।

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रविवार को खेत की बाड़ पर लगाने के लिए कटीली झाड़ियां लेने गए हरलालपुरा के किसान हरि बिहारी पर तेंदुए ने हमला बोल दिया था। घायल किसान को इलाज के लिए सीएचसी पर भर्ती कराया था। तभी से वन विभाग की टीम रेंजर आरके सिंह राठौड़ के नेतृत्व में तेंदुए की घेराबंदी कर रही थी। सोमवार सुबह साढे़ 10 बजे तेंदुआ मृत पड़ा मिला। डीएफओ दिवाकर श्रीवास्तव ने डॉ. इलियाराजा के साथ शव का परीक्षण किया। तेंदुए के शरीर पर चोट का कोई निशान नहीं मिला। 
डीएफओ दिवाकर श्रीवास्तव ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर ही मौत की वजह स्पष्ट हो सकेगी। रेंजर आरके सिंह राठौड़ ने बताया कि जानकारी होने पर ग्रामीण झुंड में हिम्मत जुटाकर तेंदुए की ओर बढे़ तो तेंदुआ खड़ा हुआ। ग्रामीणों की ओर गुर्राया और गिर पड़ा। इसके बाद उठा नहीं। पास जाकर पता चला कि तेंदुए की मौत हो गई है। 

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तेंदुए की मौत पर ये उठे सवाल
- तीन साल के तेंदुए का शरीर बेहद कमजोर कैसे 
- रात भर टार्च की रोशनी दिखाने पर भागा क्यों नहीं
- बेसुध होने के पीछे कोई जहरीला पदार्थ तो नहीं
- चंबल में खाना भरपूर, संक्रमण कैसे हुआ 

तेंदुओं का प्रजनन सीजन पूरा, कुनबा बढ़ने की उम्मीद
तेंदुए का प्रजनन सीजन सितंबर से दिसंबर तक होता है। बाह के रेंजर आरके सिंह राठौड़ ने बताया कि सीजन पूरा होने के साथ ही चंबल में इनका कुनबा बढ़ने की उम्मीद है। पिछले साल कांबिंग के दौरान मऊ, नावली, मऊ की मढै़या के बीच दो शावकों के साथ नर मादा तेंदुए, हथकांत, नंदगवां, महुआशाला के बीच दो शावकों के साथ नर मादा तेंदुए, कैंजरा, सिमराई, गोंसिली, बाघराजपुरा के बीच दो शावकों के साथ मादा तेंदुआ, पडुआपुरा, मनसुखपुरा, रेहा, बरैंडा में दो शावकों के साथ नर मादा तेंदुए दिखे थे। 

कुल सात तेंदुए और आठ शावक मिले थे। चंबल में तेंदओं की मौजूदगी के मद्देनजर वन विभाग की टीम बीहड़ क्षेत्र के गांवों में मानव वन्य जीव संघर्ष जागरूकता अभियान भी चला रही है। ग्रामीणों को बीहड़ में न जाने, गांव के नजदीक तेंदुआ दिखने पर वन विभाग को सूचना देने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। 
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