आगरा। जिले में जनवरी से अब तक माता-पिता की डांट और दोस्तों की बातों पर भरोसा कर करीब 825 युवतियां घर छोड़ चुकी हैं। इनमें से कई युवतियों का रास्ते में मिले मददगार और दोस्तों ने ही उत्पीड़न किया। किसी ने रुपयों की मांग की तो किसी ने बाजार में सौदा तक कर डाला। पुलिस ने अलग-अलग राज्यों से अब तक करीब 729 युवतियों को खोज निकाला है। काउंसलिंग के बाद उन्हें परिजन को सौंप दिया गया।
रास्ते में मिली मददगार ने किया सौदा
- जनवरी महीने में माता-पिता की डांट से नाराज होकर युवती ने घर छोड़ दिया। रास्ते में बोदला चौराहे के पास एक महिला मददगार मिली। उसने मदद का आश्वासन दिया। कहा कि उसके साथ रह लूं। वह काम पर लगवा देगी। सप्ताह में 4 दिन काम करना होगा बदले में 30 हजार रुपये मिलेंगे। इसके बाद 7 दिनों तक अलग-अलग होटलों में रखा। एक दिन सिकंदरा स्थित होटल में चार लोग आए। वह वहां से राजस्थान कोटा ले गए। वहां जाकर सौदा कर दिया। बड़ी मुश्किल से वह नारी निकेतन पहुंची। इसके बाद आगरा के एक अधिवक्ता के प्रयास से घर आगरा लौट पाई।
दोस्त ने रुपयों के लिए किया उत्पीड़न
शाहगंज थाना क्षेत्र की एक युवती को युवक बहलाकर अपने साथ ले गया। कुछ दिनों तक अच्छे से रखा। बाद में विवाद करने लगा। रुपयों की मांग कर उत्पीड़न करने लगा। काम के बहाने जाने की बोलकर उसे दिल्ली छोड़कर आ गया। पुलिस ने तलाश कर परिजन को सौंपा। युवती ने बताया कि घर से बाहर निकलने पर उसे अपनी गलती का अहसास हुआ।
जिसने अकेला पाया की छेड़छाड़
न्यू आगरा थाना क्षेत्र से तीन महीने पहले एक युवती माता-पिता की डांट से नाराज होकर घर छोड़कर चली गई। शिकायत पर पुलिस की चार टीमें लगाई गईं। तीन दिन बाद दिल्ली में मिली। वह बहुत डरी सहमी थी। पूछने पर बताया कि जिसने भी अकेला देखा छेड़छाड़ की। बहलाने की कोशिश की मगर वह उनकी बातों में नहीं आई। बड़ी मुश्किल से सुरक्षित रह पाई। अब परिजन के पास पहुंचकर सुकून है।
वर्जन
कोर्ट में कराए जाते हैं बयान
डीसीपी सिटी सैयद अली अब्बास ने बताया कि परिजन की शिकायत पर तुरंत लापता युवतियों की गुमशुदगी दर्ज कर तलाश शुरू करा दी जाती है। कोर्ट में बयान कराने के बाद उन्हें परिजन को सौंप दिया जाता है।