एमएलसी डॉ आकाश अग्रवाल, विधायक डॉ जी.एस धर्मेश
- फोटो : संवाद
उत्तर प्रदेश के आगरा में पुलिस हो या प्रशासन, या कोई अन्य विभाग। यहां जनता की तो छोड़िए जनप्रतिनिधियों की भी सुनवाई नहीं हो रही है। भाजपा विधायक डॉ. जीएस धर्मेश के बयान में यह दर्द झलका। उन्होंने कमिश्नरेट पुलिस प्रणाली पर प्रश्नचिह्न खड़ा किया। इधर, अन्य जनप्रतिनिधियों का अनुभव भी सिस्टम को लेकर अच्छा नहीं रहा।
पुलिस चौकी, थाना स्तर से लेकर एसीपी, डीसीपी व पुलिस कमिश्नर कार्यालय तक फरियादियों की कतार है। चौकी व थाने में सुनवाई नहीं होने पर आला हाकिमों से गुहार लगानी पड़ती है। दूसरी तरफ तहसील स्तर पर संपूर्ण समाधान दिवस में हर माह 60 से 70 शिकायतें पुलिस विभाग की पहुंच रही हैं। कोई पुलिस की कार्यशैली से संतुष्ट नहीं है तो कोई पुलिस कर्मियों के व्यवहार से।
कोई घटना के खुलासे तो कोई जांच व विवेचना पर सवाल खड़े कर रहा है। उधर, आईजीआरएस, सीएम हेल्पलाइन, डीएम व अन्य माध्यमों से प्राप्त शिकायतों के निस्तारण में भी फर्जीवाड़ा हो रहा है। मुख्यमंत्री कार्यालय से इनका फीडबैक लिया गया गई तो यह हकीकत सामने आई। इसके बाद मंगलवार को ही मंडलायुक्त रितु माहेश्वरी ने डीएम को लापरवाह अधिकारियों के प्रति सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
मुख्यमंत्री को सौंपे हैं सभी साक्ष्य
कमिश्नरेट नहीं बल्कि कमीशन का रेट हो गई पुलिस.. बयान से सुर्खियों में आए भाजपा विधायक डॉ. जीएस धर्मेश ने बुधवार को लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की। पूर्व राज्यमंत्री डॉ. धर्मेश ने बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री को साक्ष्य सौंप दिए हैं। पुलिस कार्यशैली को लेकर जो कहा था वो जनता से जुड़ी समस्याओं के संदर्भ में कहा गया है। सीएम ने मामले में जांच कराने की बात कही है।
अफसरशाही हावी, बढ़ गया है भ्रष्टाचार
मैं सिर्फ पुलिस या प्रशासन की बात नहीं करता। हर विभाग में देख लीजिए। अफसरशाही हावी है। भ्रष्टाचार पहले 10% था अब 100% हो गया है। अधिकारी अपनी मनमानी कर रहे हैं। सुविधा शुल्क के बिना कोई काम नहीं होता। जनता की समस्याएं उठाते हैं। यही वजह है कि 2024 में जनता ने सरकार का साथ नहीं दिया। - डॉ. आकाश अग्रवाल, सदस्य विधान परिषद