यूपी के फिरोजाबाद में सोमवार को जिले की सियासी जमीन पर हाई वोल्टेज ड्रामा हुआ। जिला पंचायत अध्यक्ष पद के नामांकन से पहले सपा समर्थित दस जिला पंचायत सदस्य भाजपा के खेमे में चले गए।
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सपा के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद प्रोफेसर रामगोपाल यादव ने सभा में अपनी ही पार्टी के विधायक हरिओम यादव पर आठ से दस करोड़ तक की डील करके सपा समर्थित सदस्यों को भाजपा को बेचने का आरोप लगाया तो सियासी तूफान खड़ा हो गया।
रामगोपाल यादव ने खुल कर कहा पार्टी को दगा देकर जेल के अंदर भाजपा नेताओं के साथ उनके विधायक ने यह डील की। उधर जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए भाजपा प्रत्याशी अमोल यादव ने नामांकन किया।
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सपा प्रत्याशी निर्मला यादव का नामांकन पत्र निरस्त होने के कारण अमोल यादव का निर्विरोध अध्यक्ष बनना तय हो गयाहै। जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए सोमवार को नामांकन था।
सपा कार्यकर्ता
- फोटो : अमर उजाला
रविवार रात को भाजपा ने जसराना से सपा के पूर्व विधायक रामवीर यादव के पुत्र अमोल यादव को प्रत्याशी बनाने की घोषणा की। सपा ने पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष विजय प्रताप छोटू को प्रत्याशी बनाया था लेकिन शासन द्वारा छोटू की सदस्यता खत्म
करने के बाद सपा नया उम्मीदवार तय करने पर मंथन कर रही थी।
इस मंथन में जेल में बंद सपा के सिरसागंज विधायक हरिओम यादव की राय भी ली जा रही थी। इसके लिए सांसद अक्षय यादव दो बार हरिओम यादव से मिलने जेल गए थे। 33 सदस्यों वाली जिला पंचायत में संख्या बल के आधार पर सपा नेता दम भर रहे थे और 22 सदस्य साथ होने का दावा कर रहे थे।
छोटू की सदस्यता खत्म करने, विधायक हरिओम यादव सहित सपा समर्थित जिला पंचायत सदस्यों पर लगातार मुकदमे दर्ज करने के विरोध में सपा के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद प्रोफेसर रामगोपाल यादव ने सोमवार को पार्टी कार्यालय पर भाजपा सरकार के खिलाफ सभा बुलाई थी।
होने लगा विरोध
भाजपा उम्मीदवार अमोल यादव
- फोटो : अमर उजाला
सभा तो सरकार के खिलाफ आयोजित थी लेकिन रविवार रात को अमोल यादव की घोषणा के साथ ऐसे सियासी समीकरण बने कि सुबह होते-होते भाजपा के खिलाफ आयोजित सभा सपा के ही विधायक हरिओम यादव के विरोध में तब्दील हो गई।
सभा स्थल पर खुले मंच से सपा के राष्ट्रीय महासचिव ने कहा कि वैसे तो यह सभा प्रशासन की मनमानी के खिलाफ थी लेकिन जब हमारा ही एमएलए दगा दे गया तो फिर किसकी कहें। सपा समर्थित जिला पंचायत सदस्यों को भाजपा को बेचने का आरोप उन्होंने सपा विधायक हरिओम यादव पर लगाया।
कहा कि हरिओम यादव जेल में हैं उनसे मिलने सांसद अक्षय यादव दो बार गए। विजय प्रताप की सदस्यता खत्म कर दी गई इसलिए दूसरा उम्मीदवार भी हरिओम यादव की सहमति से तय करने पर बात फाइनल हुई। हमारे पास जीत के लिए पर्याप्त सदस्य थे।
भाजपा की सरकारों से बचाने के लिए इन सदस्यों को स्वयं उन्होंने (रामगोपाल यादव) ने ही सुरक्षित कहीं रखा था लेकिन जेल में हमारी ही पार्टी से बगावत करने वाले पूर्व विधायक रामवीर यादव, पूर्व विधायक अजीम भाई भाजपा नेताओं के साथ हरिओम यादव से मिले।
हमारे विधायक पैसों के लोभ में आ गए और आठ से दस करोड़ में सपा सदस्यों को भाजपा को सौंपने की डील कर ली। हरिओम यादव ने हमारे कब्जे वाले सदस्य भाजपा को सौंप दिए और भाजपा के एक नेता के हथियारबंद समर्थकों ने उन्हें कब्जे में ले लिया।
यदि सदस्य खुले होते तो हम संपर्क करते उनसे बात करते लेकिन हमारे ही विधायक ने ऐसा खेल खेला। जबकि उनके बेटे विजय प्रताप को हमने ही जिला पंचायत अध्यक्ष बनवाया था। मैंने हरिओम का मामला खुद राज्यसभा में उठाया।