27 जनवरी को अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा का प्रस्तावित ताज भ्रमण कार्यक्रम और खंडपीठ आंदोलनकारियों का प्रदर्शन टकरा सकता है। शनिवार को दीवानी परिसर में हुई जनप्रतिनिधि और अधिवक्ता महापंचायत में वकीलों ने इस बार खंडपीठ आंदोलन को आरपार की लड़ाई बताया। अंत में सर्वसम्मति से फैसला किया गया कि वकील अमेरिकी राष्ट्रपति का विरोध तो नहीं करेंगे लेकिन 27 को जनप्रतिनिधियों संग ताज का घेराव करेंगे, जिससे ओबामा ताज नहीं देख पाएंगे।
वर्षों से चली आ रही खंडपीठ की मांग पर महापंचायत में राजनीति और सरकारों की उदासीनता पर आक्रोश व्यक्त किया गया। वक्ताओं ने कहा कि जसवंत सिंह आयोग की सभी सिफारिश मान ली गई। सिर्फ एक न मानी गई कि आगरा में बेंच बने। इसकी जिम्मेदार सिर्फ राजनीति है। अब हम बैठने वाले नहीं, हाईकोर्ट खंडपीठ लेकर रहेंगे। सभा में बड़ा जनांदोलन खड़ा करने पर जोर दिया गया। इसके लिए तय हुआ कि 20 जनवरी को सभी सामाजिक-व्यापारिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक की जाएगी। अंत में ताजमहल के घेराव और वकीलों के 28 जनवरी तक कार्य से विरत रहने का फैसला किया गया।
हाईकोर्ट खंडपीठ स्थापना संघर्ष समिति की ओर से आयोजित महापंचायत की अध्यक्षता समिति के संयोजक केडी शर्मा ने की। इसमें विभिन्न जिलों के वकीलों की एकजुटता ने आने वाले दिनों में आंदोलन की ताकत बताई। दो कमिश्नरी से दस जिलों के अधिवक्ताओं ने भाग लिया। मौसम खराब होने के चलते कई जिलों ने अपना समर्थन पत्र भेजा। आगरा के सभी विधायक, पार्टियों के पदाधिकारी और सीकरी के सांसद बाबूलाल ने खुलकर समर्थन देने का वादा किया। केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री डा. रामशंकर कठेरिया के प्रतिनिधि ने उनका समर्थन पत्र पढ़ा। संचालन समिति के महासचिव अरुण सोलंकी ने किया।