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दो नवजात की मौत में डॉक्टर की लापरवाही सामने आई, अस्पताल का लाइसेंस निलंबित

Fri, 02 Nov 2018 08:28 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
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शमसाबाद रोड स्थित अस्पताल पब्लिक वेलफेयर
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आगरा में दो नवजात की मौत की मजिस्ट्रेटी जांच में स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. कहकशां खान को घटना के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है। उनके शमसाबाद रोड स्थित अस्पताल पब्लिक वेलफेयर का लाइसेंस निलंबित कर दिया गया है। डॉक्टर की शिकायत मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) से की गई है।
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बरौली अहीर निवासी डॉ. रोहताश यादव और कमलेश देवी ने लापरवाही से नवजात की मौत का आरोप लगाते हुए जिलाधिकारी से जांच की मांग की थी। दोनों गर्भवती महिलाओं का प्रसव एक अक्तूबर, 2017 को हुआ था। 

जिलाधिकारी की बनाई जांच टीम में एसीएम चतुर्थ विनीता सिंह के नेतृत्व में एसीएमओ डॉ. अजय कपूर और डॉ. नीता कुलश्रेष्ठ, बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. नीरज यादव और सीओ उदयराज सिंह थे। जांच में लापरवाही सिद्ध पाई हुई। 
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ये गड़बड़ियां मिलीं

मजिस्ट्रेट ने अग्रिम आदेश तक हॉस्पिटल संचालन की भी रोक लगाई है। सीएमओ डॉ. मुकेश वत्स ने बताया कि अस्पताल का लाइसेंस निलंबित करते हुए डॉक्टर पर कार्रवाई के लिए एमसीआई को भी लिखा है। 

- नवजात सघन चिकित्सा कक्ष में निरीक्षण के वक्त कोई डॉक्टर नहीं मिला। मौके पर एक बच्ची भर्ती थी। मानकों के अनुसार नवजात सघन चिकित्सा कक्ष नहीं मिला। 
- हॉस्पिटल में प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ नहीं था। रोमा नामक लड़की पैरामेडिकल कार्य करते मिली, जबकि उसका असली नाम रूपवती है। प्रशिक्षित नहीं थी।
- इलाज करने वाले पैनल में शामिल डॉक्टरों के नाम दर्ज नहीं थे, ऑन कॉल बुलाए जाने वाले डॉक्टर स्वास्थ्य विभाग के यहां पंजीकृत नहीं कराए गए। 
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ऐसे हुई थी दो की मौत

डॉ. रोहताश यादव का आरोप था कि उनकी पत्नी की पब्लिक वेलफेयर हॉस्पिटल में जबरदस्ती डिलीवरी करा दी गई थी। मना करने के बावजूद प्रसव पीड़ा बढ़ाने के लिए ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन का हैवी डोज लगाया गया। किसने लगाया, ये भी नहीं बताया। इससे गर्भस्थ शिशु की मौत हो गई थी। डॉ. रोहताश दंत रोग विशेषज्ञ हैं। 

शिशु की नाक में नली डालने पर आने लगा था खून

बरौली अहीर निवासी कमलेश देवी की पुत्र वधू का इसी अस्पताल में प्रसव हुआ। पुत्रवधू शिशु को स्तनपान करा रही थी। इसी वक्त कंपाउंडर आया और नवजात की नाक में नली डालने लगा। शिशु छटपटाया और नाक से खून आने लगा। डॉ. कहकशां खान आईं और शिशु को रवि हॉस्पिटल रेफर कर दिया। यहां एक रात रुकने के बाद एसएन के लिए भेज दिया। यहां दो घंटे बाद शिशु की मौत हो गई। 

हॉस्पिटल के अभी भी संचालन का आरोप

पीड़ित डॉ. रोहताश यादव का आरोप है कि मजिस्ट्रेट के आदेश के बावजूद भी अभी हॉस्पिटल का संचालन हो रहा है। इनके खिलाफ अभी तक रिपोर्ट भी नहीं दर्ज कराई है, जबकि राष्ट्रीय बाल आयोग ने एसएसपी को डॉक्टर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं। पंजीकृत अस्पताल प्रभारी डॉ. अजय कपूर का कहना है कि निरीक्षण किया जाएगा अगर अस्पताल संचालित मिला तो कार्रवाई की जाएगी। 
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