फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

UP News: बंदर से डरकर भागा मजदूर...आगे इंतजार कर रही थी मौत, हुआ ऐसा हादसा; तड़प-तड़प कर गई जान

Thu, 24 Oct 2024 04:53 PM IST
धीरेन्द्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, एटा

सार

बंदर से डरकर जान बचाने के लिए मजदूर भागा, लेकिन आगे भी उसका इंतजार मौत कर रही थी। डर के वजह से इस कदर दहशत में आ गया, कि तीसरी मंजिल से गिर गया। मजदूर की मौके पर ही मौत हो गई। 
 
विज्ञापन
उछल कूद करता बंदर
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

एटा के मोहल्ला विद्या विहार में बृहस्पतिवार को एक मकान पर मजदूरी कर रहा व्यक्ति बंदर की घुड़की से डरकर छत से गिर गया। इससे उसकी मौत हो गई। परिजन बिना पोस्टमार्टम कराए ही शव ले गए।
विज्ञापन


थाना मलावन के गांव थरौली निवासी आलोक कुमार ने बताया कि विद्या विहार में उनका मकान बन रहा है। बृहस्पतिवार को तीसरी मंजिल पर प्लास्टर का काम किया जा रहा था। चाचा अखिलेश कुमार भी मजदूरी कर रहे थे। प्लास्टर के लिए दूसरी मंजिल पर मसाला बनाया जा रहा था। मजदूर यहां से मसाला लेकर ऊपर जा रहे थे। सीढ़ियां चढ़ते समय सामने से बंदर ने घुड़की दिखाई और चाचा की ओर आने लगा। 

ये भी पढ़ें -  UP ByPoll:  अखिलेश यादव के जीजा अनुजेश यादव की दो टूक, इस लड़ाई में फूफा, न कोई भतीजा...सपा v/s भाजपा की जंग
विज्ञापन



 

बंदर से बचने के लिए लगाई दौड़
बताया गया है कि बंदर को अपनी ओर आतादेख अखिलेश कुमार ने दौड़ लगा दी। इस दौरान अखिलेश का पैर दिवार के किनारे से फिसल गया और वे सीधे नीचे आ गर गिरे। हादसे को देख मौके पर चीख पुकार मच गई। तत्काल ही उपचार के लिए मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सक ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। 

परिवार में मचा कोहराम
मजदूर की मौत की खबर मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया। परिवार के लोग बिना पोस्टमार्टम कराए ही शव को गांव में ले गए। 

ये भी पढ़ें -  एटा में दर्दनाक हादसा: भागवत कथा के समापन पर कलश विसर्जन के दौरान डूब गईं दो किशोरियां, तलाश में जुटे गोताखोर
 

बदरों के भय से लोगों ने छतों पर लगवा लिए हैं जाल
शहर के कुछ हिस्सों में बंदरों का आतंक बढ़ता ही जा रहा है, जिसके कारण लोग परेशान हैं। कुछ लोगों ने तो घरों के छज्जे से लेकर छत तक लोहे के जाल लगवा लिए हैं। विशेष रूप से शहर के पुरानी बस्ती, गोविंद नगर, अवागढ़ हाउस और मेडिकल कॉलेज के नर्सिंग हॉस्टल आदि स्थानों पर बंदरों का आतंक है।
विज्ञापन

नहीं पकड़वाए गए बंदर
शहर के लोगों को सुरक्षित जीवन मुहैया कराने की जिम्मेदारी जहां जिला प्रशासन और नगर पालिका की है। वहीं, वन्य जीवों से रक्षा करने के लिए वन विभाग भी जिम्मेदार है। लेकिन शहर में बंदरों के मामले में ये सभी अपनी जिम्मेदारियों से बचते नजर आते हैं। यही वजह रही है कि कभी यहां बंदर पकड़वाने के प्रयास तक नहीं किए गए। जबकि पड़ोसी जिलों से बंदरों पकड़कर सीमाओं पर छाेड़ा जाता रहा और यहां बंदरों की संख्या बढ़ती जा रही है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें