भागवत भवन में चांदी की गाय के साथ भगवान के जन्म के बाद भक्तगणों ने दर्शन किए ।
- फोटो : अमर उजाला
मथुरा में सोमवार की मध्यरात्रि को जन्मस्थान पर भगवान का प्राकट्य होते ही जयजयकार गूंजने लगी। हर तरफ उत्साह का माहौल था। कान्हा के जन्म की खुशी में नाचते-गाते भक्तों का हुजूम हर तरफ दिख रहा था। हर किसी की चाह थी तो बस अपने इस आराध्य की एक झलक पाने की।
रात 12 बजे अजन्मे के प्राकट्य के साथ ही महाआरती हुई और ठाकुरजी को मोछर्लासन में विराजमान कर अभिषेक स्थल तक लाया गया। रात 12:15 पर जन्मभूमि न्यास ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपालदास महाराज के सान्निध्य में ठाकुरजी का अभिषेक शुरू हुआ।
इससे पूर्व उन्होंने पर्यावरण की रक्षा व प्राकृतिक आपदाओं से मुक्ति के लिए संकल्प लिया। दूध, दही, शहद, घी, बूरा, यमुना जल से सेवायतों ने चांदी की 51 किलो की कामधेनु गाय के पयोधरों से आराध्य का पंचामृत अभिषेक किया।
इससे पूर्व रात 11 बजे श्रीगणेश व नवग्रह का पूजन किया गया। रात 12:40 से 12:50 तक भक्तों ने श्रृंगार के दर्शन किए। मंदिर के कपाट रात 1:30 बजे बंद कर दिए गए। इस दौरान संस्थान के ट्रस्टी अनुराग डालमिया, सचिव कपिल शर्मा, सदस्य गोपेश्वर नाथ चतुर्वेदी आदि मौजूद रहे। गोविंद नगर गेट से श्रद्धालुओं को प्रवेश दिया गया जबकि मुख्य द्वार से उन्हें बाहर निकाला गया।