इंदिरा गांधी की रैली में गाने से इन्कार करना मशहूर गायक किशोर कुमार को भारी पड़ा था। दूरदर्शन और आकाशवाणी पर उनके गानों के प्रसारण पर प्रतिबंध लगा दिया। 1977 में कांग्रेस शासन की ज्यादतियों की जांच के लिए शाह आयोग का गठन किया गया। आयोग के समक्ष बयान में पूर्व सूचना और प्रसारण मंत्री विद्याचरण शुक्ल ने इसके लिए खुद को जिम्मेदार माना।
29 अक्तूबर 1977 को अमर उजाला में प्रकाशित खबर के अनुसार, आपातकाल के दौरान सरकार के बीस सूत्री कार्यक्रम और इंदिरा की रैलियों में फिल्मी कलाकारों से भाग लेने के लिए कहा गया था। किशोर कुमार ने सेहत का हवाला देकर भाग लेने से इन्कार कर दिया। उन्होंने कहा कि वह दिल के मरीज हैं और स्टेज पर गाना नहीं गा सकते।
किशोर कुमार के इन्कार पर कांग्रेस नेता नाराज हो गए। तत्कालीन सूचना एवं प्रसारण मंत्री विद्याचरण शुक्ल ने किशोर कुमार के गानों के प्रसारण पर रोक लगा दी। उन्होंने उस समय सूचना मंत्रालय के संयुक्त सचिव सीबी जैन ने आकाशवाणी और दूरदर्शन के महानिदेशकों से किशोर कुमार के गानों का प्रसारण रोकने के लिए कहा। 1977 में जनता पार्टी सरकार ने आपातकाल में कांग्रेस की ज्यादतियों की जांच के लिए शाह आयोग का गठन किया। शुक्ल ने आयोग के समक्ष अपने बयान में इस बात को स्वीकार किया और गलती के लिए खुद को जिम्मेदार माना। कहा कि उनके अधीन अधिकारियों की इसमें कोई गलती नहीं है।
शुक्ल ने आयोग के समक्ष कहा कि किशोर कुमार के मामले में अधिकारियों ने उनसे स्वीकृति ली थी। आयोग के समक्ष पेश विवरण में कहा गया कि मंत्रालय के अधिकारियों ने दूरदर्शन और आकाशवाणी पर किशोर कुमार के गानों पर तीन महीनों तक प्रसारण रोकने का आदेश दिया। साथ ही उन सभी निर्माणाधीन फिल्मों पर भी पाबंदी लगा दी जिनमें किशोर के गाने शामिल थे। दो ग्रामोफोन कंपनियों को भी उनके गाने बेचने पर रोक लगा दी।