किसान आंदोलन के एक माह बाद भी आगरा से दिल्ली, पलवल जाने वाली रोडवेज बसों का संचालन बंद है। परिवहन निगम को प्रतिदिन 75 बसों के बंद होने से 2.70 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ तो वहीं यात्रियों के लिए दिल्ली का सफर महंगा और दिक्कत भरा हो गया है।
किसान आंदोलन के कारण दिल्ली, पंजाब, हरियाणा के रास्तों के बंद होने के कारण परिवहन निगम की दिल्ली के सराय काले खां आईएसबीटी जाने वाली बसें 27 नवंबर से बंद हैं। पलवल तक भी बसें नहीं जा पा रही हैं। परिवहन निगम की बसें वाया यमुना एक्सप्रेसवे होकर संचालित हो रही हैं मगर इनकी संख्या कम है।
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अशोक नगर के धर्मवीर सिंह का कहना है कि सप्ताह में तीन बार दिल्ली जाना होता है, मगर इस माह एक्सप्रेसवे से होकर जाने में किराया अधिक लगता है तो बसें भी आसानी से नहीं मिलती हैं। आवास विकास कॉलोनी की पूनम अग्रवाल ने बताया कि अब दिल्ली जाने के लिए बसें आसानी से नहीं मिलती हैं। कमला नगर के सौरभ का कहना है कि किराया भी बढ़ गया और दिक्कतें भी।
परिवहन निगम के क्षेत्रीय प्रबंधक मनोज पुंढीर ने बताया कि दिल्ली हाईवे की बसें बंद होने से रोडवेज को नौ लाख रुपये रोजाना का घाटा उठाना पड़ रहा है। एक्सप्रेसवे होकर बसें संचालित हैं मगर इनकी संख्या ज्यादा नहीं है। साधारण बसें ज्यादा व एसी कम हैं क्योंकि किराया अधिक है।
ट्रांसपोर्टर्स के खर्च में हुआ इजाफा, हर गाड़ी पर तीन हजार रुपये बढ़े
पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू व कश्मीर से आने वाला माल वाया शामली मेरठ रूट से होकर लाना पड़ रहा है। इससे जहां ट्रांसपोर्टर्स का खर्च बढ़ा है तो वहीं व्यापारियों ने किराया नहीं बढ़ाया है। इससे ट्रांसपोर्टर्स परेशान हैं।
इस माह बढ़ा देंगे किराया
आंदोलन के कारण एक माह से घाटा उठा रहे हैं। हर गाड़ी की लागत ढाई से तीन हजार बढ़ गई है। रास्ता 100 से 150 किलोमीटर तक लंबा हो गया है। ऐसे में माल को दो से तीन दिन अधिक लग रहे हैं। इस माह आंदोलन खत्म नहीं हुआ तो किराया बढ़ाना पड़ेगा। -दीपक शर्मा, अध्यक्ष, आगरा गुड्स कैरियर एसोसिएशन
रास्ते बंद होने का असर ट्रांसपोर्टेशन पर पड़ा
किसान आंदोलन के कारण एक माह से ट्रांसपोर्टर्स की लागत बढ़ी है तो वहीं व्यापारियों ने माल मंगवाना भी कम कर दिया है। माल की आवक पर असर पड़ा है। इसका नुकसान सबसे ज्यादा तो ट्रांसपोर्टर्स को ही उठाना पड़ा है। -देवेंद्र गुप्ता, महासचिव, आगरा पब्लिक कैरियर एसोसिएशन