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नकल रोकने के नाम पर खानापूर्ति की जा रही

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आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (औटा) के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया है कि विश्वविद्यालय प्रशासन नकल विहीन और शुचितापूर्ण परीक्षा कराने में पूरी तरह से असफल है। नकल रोकने के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है। यह निर्णय लिया है कि संगठन से जुड़े शिक्षक उड़नदस्ता और पर्यवेक्षक के रूप में काम नहीं करेंगे। खुद को परीक्षा के संचालन तक सीमित रखेंगे।
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औटा के अध्यक्ष डॉ. ओमवीर सिंह का कहना है कि संगठन की ओर से परीक्षा के शुरूआत से कई स्तरों की अनियमितताओं को विश्वविद्यालय के अधिकारियों के संज्ञान में लाया है। पता नहीं किन वजहों से विश्वविद्यालय के अधिकारी स्ववित्तपोषित कॉलेजों में नकल, केंद्रों के कंट्रोल रूम से न जुड़ने, सामूहिक नकल, परीक्षा केंद्र आपस में डाले जाने, उड़नदस्तों की अनियमितताओं और कथिक वसूली का संज्ञान नहीं ले रहे हैं। उनका कहना है कि तीन अगस्त की शाम को ऑनलाइन बैठक में कुलपति को वस्तुस्थिति से अवगत कराया गया, उन्होंने ने गंभीरता से नहीं लिया और कोई ठोस कार्रवाई का आश्वासन भी नहीं दिया।
औटा की ओर से शिक्षकों से उड़नदस्ते में न शामिल होने की अपील के बाद भी शिक्षक लगातार उड़नदस्ते के सदस्य के तौर पर परीक्षा केंद्रों का निरीक्षण करने जा रहा है। संख्या जरूर कुछ कम हुई है। उड़नदस्ता प्रभारी प्रो. मनोज श्रीवास्तव ने बताया कि उड़नदस्ते में संबद्ध कॉलेजों की संख्या के अनुरूप शिक्षकों को स्थान दिया गया था। 27 जुलाई को उड़नदस्तों में 45 सदस्य थे, इसमें से 31 कॉलेजों से और 12 आवासीय विंग से थे, 28 जुलाई को 57 में से 44 सदस्य एडेड कॉलेज से रहे। अब औटा की रोक के बाद संख्या कम हुई है। मजबूरी में आवासीय इकाइयों के शिक्षक बढ़ाने पड़े। चार अगस्त को आवासीय इकाइयों व कॉलेजों के 15-15 सदस्य केंद्रों का निरीक्षण करने निकले।
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‘एडेड कॉलेजों के वही शिक्षक अब उड़नदस्तों में जा रहे हैं, गत 14-15 वर्षों से इस व्यवस्था का हिस्सा हैं। खासतौर पर पूर्व औटा अध्यक्ष और महामंत्री के नजदीकी शामिल हैं। औटा के वर्तमान पदाधिकारी अपनी अच्छी छवि की वजह से चुने गए हैं, उसी के अनुरूप काम करेंगे।’ - डॉ. ओमवीर सिंह
‘विश्वविद्यालय की परीक्षाएं नियमानुसार कराई जा रही हैं। उड़नदस्ते लगातार अनियमितताओं की रिपोर्ट दे रहे हैं। उस पर कदम भी उठाया जा रहा है। ऐसे 17 कॉलेजों को नोटिस जारी किया जा चुका है। यूएफएम कमेटी का गठन कर दिया गया है। विश्वविद्यालय के सभी घटकों से अपेक्षा है कि वह परीक्षाओं को शुचितापूर्ण तरीके से संपन्न कराने में सहयोग दें।’ - प्रो. आलोक कुमार राय, प्रभारी कुलपति
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