भगवान शिव की आस्था में शिवभक्त डूबे हुए हैं। महाशिवरात्रि पर्व पर भगवान शिव के पवित्र गंगाजल से अभिषेक करने के लिए तीर्थनगरी से लेकर लहरा घाट तक श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला जारी है। कांधे पर कांवड़ लिए शिवभक्त बम-बम भोले के जयकारे से वातावरण को भक्तिमय बनाए हुए हैं।
महाशिवरात्रि पर्व 11 मार्च को है। मान्यता है कि इस दिन उपवास रखकर भगवान भोले का पवित्र गंगाजल से अभिषेक करने व उनकी भक्ति करने से भक्तों को मनवांछित फल की प्राप्ति होती है। भगवान शिव की उपासना का यह सबसे बड़ा पर्व है। इस पर्व को लेकर शिवभक्तों में अभी से उत्साह है। मध्यप्रदेश, राजस्थान सहित दूरदराज इलाकों से शिवभक्त गंगाजल लेने लहरा घाट पहुंच रहे हैं। इससे पहले तीर्थनगरी सोरों से कांवड़ साज-सज्जा का सामान खरीदकर कांवड़ को आकर्षक बना रहे हैं। शिवभक्तों के पहुंचने से तीर्थनगरी सोरों, लहराघाट पर वातावरण भक्तिमय है। कांवड़ लेकर लौट रहे शिवभक्त कासगंज में भोले की जयकार करते हुए गंतव्य की ओर जा रहे हैं।
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पंडित जगदीश महेरे ने बताया कि फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष चतुर्दशी को महाशिवरात्रि का व्रत किया जाता है। इस बार महाशिवरात्रि 11 मार्च को हैै। इस दिन चतुर्दशी तिथि दोपहर 2:41 मिनट से 12 मार्च दोपहर 3:03 मिनट तक रहेगी।
सजा हुआ है कांवड़ मेला
तीर्थनगरी में लगे मेले में श्रद्धालु कांवड़ सजाने का सामान घुंघरू, घंटी, देवी, देवताओं की तस्वीरें आदि खरीद रहे हैं। गंगा जल भरने के लिए कांच का पात्र खरीद रहे हैं। लहरा घाट पर गंगा स्नान करके कांवड़ का पूजन करने के बाद कांवड़ में गंगाजल का पात्र रखते हैं। इसके बाद भोला तेरी बम के जयकारे लगाते हुए कांवड़िए अपने गंतव्यों को प्रस्थान कर रहे हैं।
18 साल से अनवरत गंगाजल लेने आ रहे चार दोस्त
मध्यप्रदेश के मुरैना से चार दोस्त शिवभक्ति में पूरी तरह डूबे हुए हैं। वे 18 साल से निरंतर तीर्थनगरी आ रहे हैं। वह हरिपदी में गंगा स्नान कर कांवड़ सजाते हैं। और लहरा घाट से गंगाजल ले जाकर मुरैना के शिव मंदिर में भोले का गंगाजल से अभिषेक करते हैं। इन दोस्तों का नेतृत्व पहलवान सिंह सरपंच करते हैं।
दोस्तों की बात-
- भगवान शिव में अगाध श्रद्धा है। महादेव की कृपा से सारे कठिन काज बड़ी आसानी से पूर्ण हो जाते हैं। लाकडाउन के कारण इस बार श्रावण मास में नहीं आ पाए जिसके कारण फाल्गुन मास में आए हैं। - पहलवान सिंह सरपंच, मुरैना ।
- मुरैना से सोरों जी की दूरी सवा दो सौ किलोमीटर के लगभग है। ऊं नम: शिवाय का जाप करते करते यह दूरी बड़ी आसानी से तय हो जाती है। भगवान शिव के प्रति हम दोस्तों में आस्था है। - जंदल सिंह,मुरैना ।
कासगंज-सोरों रोड पर गुजरती कांवड़ियों की टोली- फोटो : KASGANJ