गणतंत्र दिवस से लगातार जल रहे कासगंज के हालात आज भी वही हैं जो पहले दिन थे। प्रशासन लगातार सुधार के दावे कर रहा है लेकिन धरातल पर कुछ भी नहीं है। नतीजन रविवार को तीसरे दिन पुलिस ने घर-घर तलाशी अभियान शुरू कर दिया है। उपद्रवियों की तलाश अब भी जारी है।
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कासगंज में बीते 25 साल में अब तक हुए सबसे बड़े उपद्रव की शुरुआत 26 जनवरी को हुई। सुबह-सुबह तिरंगा यात्रा लेकर बाइक पर निकले 40-50 युवाओं की टोली जब करीब 10 बजे बड्डू नगर इलाके से गुजर रही थी तो नारेबाजी के दौरान इन युवाओं पर कुछ लोगों ने पथराव कर दिया।
इस पर विवाद बढ़ा और 10 बजकर 20 मिनट पर कासगंज में बिलराम गेट चौराहे पर कुछ लोगों ने वाहनों में तोडफ़ोड़ कर दी। 11 बजे करीब लोग प्रदर्शन करते हुए कोतवाली पहुंच गए और हंगामा होने लगा। इसके बाद करीब 11:30 बजे तहसील रोड-सूत की मंडी तिराहे पर दो पक्षों में पथराव हो गया। इसी बवाल में फायरिंग होने लगी। फायरिंग में एक युवक अभिषेक उर्फ चंदन गुप्ता गोली लगने से घायल हुआ।
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कासगंज हिंसा
- फोटो : self
अस्पताल ले जाते समय उसने दम तोड़ दिया। दोपहर 12:15 बजे डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। बवाल की आशंका पर दोपहर 12:30 बजे सारे बाजार बंद हो गए। बड्डू नगर इलाके में लोगों की भीड़ जुटने लगी। सूचना पर सांसद राजवीर सिंह मौके पर पहुंचे। डीएम आरपी सिंह और एसपी ने भी घटनास्थल का रुख किया। दोपहर 1:10 बजे तक आईजी अलीगढ़ भी कासगंज कोतवाली पहुंच गए थे।
दोपहर 2 बजे सांसद राजवीर ने दोषियों पर कार्रवाई का भरोसा दिया। इसके बाद पुलिस ने शव पोस्टमार्टम गृह भेजा। शाम 4 बजे जाकर पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू हुई और शाम 7 बजे मृतक का शव घर पहुंचते ही पूरे शहर में तनाव के हालात पैदा हो गए। प्रशासन ने शहर भर में पुलिस और पीएसी तैनात कर दी। आईजी अलीगढ़ संजीव गुप्ता, कमिश्रर अलीगढ़ सुभाष चंद्र शर्मा ने कासगंज में ही कैंप किया। शासन को मामले की पूरी जानकारी दी गई।
दूसरे दिन सुबह 7:30 बजे मृतक का शव अंतिम संस्कार के लिए ले जाया जाने लगा। शव यात्रा में सैंकड़ों की संख्या में लोग जुटे। सुबह 8:30 बजे शवयात्रा काली नदी मुक्तिधाम पहुंची। चिता सजते ही लोग धरने पर बैठ गए। सुबह करीब 10 बजे सांसद राजवीर ने मृतक के परिवारीजनों की सीएम योगी से बात कराई। सीएम के आश्वासन पर मृतक का अंतिम संस्कार किया गया।
एक दुकान को उपद्रवियों आग के हवाले किया
- फोटो : अमर उजाला
दोपहर 11:30 बजे अंतिम संस्कार से जुलूस के रूप में लौट रहे लोगों ने पुरानी चुंगी इलाके में कई वाहनों में तोडफ़ोड़ की। एक लकड़ी के खोखे को आग के हवाले कर दिया। दोपहर 12:30 बजे बाराद्वारी इलाके में कई दुकानों में तोडफ़ोड़ के बाद आग लगा दी गई। दोपहर एक बजे प्रशासन ने लोगों को घरों से बाहर न निकलने की हिदायत दी। शहर भर में धारा 144 को लेकर अनाउंसमेंट किया जाने लगा। पीएसी और आरएएफ ने गश्त शुरू किया।
दोपहर में 1:15 बजे एडीजी आगरा अजय आनंद, लखनऊ से आईजी डीके ठाकुर, आईजी अलीगढ़ संजीव गुप्ता, कमिश्रर सुभाष चंद शर्मा ने मोर्चा संभाला। एडीजी ने हालात सामान्य होने की बात कही। पुलिस ने 49 लोगों को गिरफ्तार किया।
इसके बाद दोपहर 2:30 बजे नदरई गेट इलाके में बसों में आग लगा दी गई। शाम साढ़े पांच बजे एक एंबुलेंस को लोगों ने आग के हवाले कर दिया। शाम 6 बजे गंगेश्वर कालोनी में एक बंद मकान और कार को आग के हवाले कर दिया।
रात को करीब 10 बजे बलवाईयों ने एक मेडिकल स्टोर को आग के हवाले कर दिया। हालात बिगड़ते देख डीएम आरपी सिंह ने रविवार रात 10 बजे तक के लिए इंटरनेट सेवाओं पर रोक लगा दी।
रविवार को सुबह-सुबह फिर से उपद्रवियों ने एक खोखे में आग लगा दी। लखनऊ में एडीजी एलओ आनंद कुमार ने उपद्रवियों पर रासुका के तहत कार्रवाई के आदेश दिए। पुलिस ने घर-घर तलाशी अभियान शुरू किया।