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Agra News: सीएम की 40 करोड़ से विकास की योजना बनेगी जैव विविधता के लिए संजीवनी

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कासगंज। जिले में जैव विविधता के लिए दरियावगंज झील एक प्राचीन व महत्वपूर्ण स्रोत है। झील न केवल तमाम तरह की वनस्पतियों को अपने आंचल में समेटे है, बल्कि जीव-जंतु व प्रवासी पक्षियों सुरक्षित बसेरा भी प्रदान करती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक दिन पूर्व दरियागवंज झील के विकास व सौंदर्यीकरण के लिए 40 करोड़ रुपये के प्रस्ताव को स्वीकृति दी है। 40 करोड़ रुपये से होने वाले जैव विविधता के कार्यों व सुंदरीकरण के कार्य दरियावगंज झील के लिए संजीवनी बनेंगे।
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100 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली दरियावगंज झील प्राचीन काल से आद्र्रक्षेत्र है। इसकी पहचान प्रदेश के आद्र्रक्षेत्र के रूप में है। इस झील में जलीय पैाधे, सैवाल, मछलियां, मेढक़, कछुआ व अन्य छोटे जलजीव बड़ी संख्या में रहते हैं। जो झील के पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखते हैं। यह झील सर्दियों के मौसम में प्रवासी पछियों का ठिकाना बनती है। नवंबर माह के बाद से फरवरी तक प्रवासी पक्षियों का कोलाहल झील के सौंदर्य को और बढ़ा देता है। इस इलाके में सारस, बत्तख, किंगफिशर, ब्लैक नेक्ड स्टॉर्क व अन्य जल पक्षी देखे जाते हैं। यहां की वनस्पति, पक्षी, जीव जंतु जैव विविधता को समृद्ध आयाम देते हैं। आद्र्र भूमि होने के कारण यह इलाके के जलसंरक्षण को सुरक्षित बनाता है। जिससे भूजल पुर्नभरण और जलवायु का संतुलन क्षेत्र में बनता है। पर्यावरणविद ऐसे इलाकों को जैव विविधता का सबसे उपयुक्त स्थान मानते हैं। इस इलाके में जैव विविधता बनाए रखने के लिए पहले से ही वन विभाग क्रियाशील है और इलाके को हरा भरा बनाने, सुंदरीकरण सहित पक्षियों की सुरक्षा आदि के लिए भी कार्य करता है। सीएम की घोषणा के बाद झील की सुंदरीकरण के नए कार्यों से झील का विकास होगा। तितलियों को आकर्षित करने के लिए तितली पार्क भी विकसित होगा। पर्यटन की दृष्टिकोण से पहुंचने वाले लोगों को सुविधाएं मिलेंगी। जीव जंतुओं और पक्षियों के लिए सुरक्षित वातावरण भी तैयार किया जाएगा। इंजीनियर अमित तिवारी बताते हैं कि जैव विविधता के लिए झील विशेष महत्व रखती है। यहां जैव विज्ञानियों, पर्यावरण विदों व छात्रों के लिए अध्ययन का एक उपयुक्त स्थान भी है। मुख्यमंत्री की घोषणा से झील विकसित होगी और जैवविविधता बढ़ेगी।

झील से जुड़े हैं पौराणिक संदर्भ
कासगंज। दरियावगंज झील को लेकर पौराणिक संदर्भ भी जुड़े हैं। यह इलाका महाभारतकाल में गुरु द्रोणाचार्य की अभ्यास स्थली रहा है। गुरु द्रोणाचार्य को यहां की जमीन राजा द्रुपद ने दान में दी थी। इसे द्रोणाचार्य सरोवर भी कहते हैं। इस भूमि पर कई ऋषि मुनियों के प्रवास की किवदंतियां भी प्रचलित हैं।
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वर्जन-
- दरियावगंज झील का 40 करोड़ रुपये से विकास होगा। व्यापक प्रस्ताव वन विभाग, सिंचाई विभाग व अन्य विभागों की मदद से तैयार किया जा रहा है। जैव विविधता बनाए रखने के लिए सभी कार्य कराए जाएंगे। दरियावगंज झील का निरीक्षण भी किया गया है। जिले की यह बड़ी प्राचीन संपदा है- मेधा रूपम, डीएम।
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