मैनपुरी। करवाचौथ के त्योहार की तैयारियां जोरों पर हैं। खरीदारी के चलते बाजार भी गुलजार हो गए हैं। महिलाएं जहां साड़ियां और शृंगार का सामान खरीद रही हैं, वहीं पुरुष उनके लिए उपहार खरीदने में व्यस्त हैं। बाजारों में उमड़ रही भीड़ से दुकानदार भी खुश हैं।
गुरुवार को करवाचौथ का त्योहार मनाया जाएगा। इसलिए खरीदारी जोरों पर हैं। साड़ियों की दुकान से लेकर चूड़ियों की दुकानों तक महिलाओं की भीड़ उमड़ रही है। मंगलवार को बाजारों में दिन भर महिलाओं ने खरीदारी की। दुकानदार राजेश ने बताया कि उनके 500 से 3000 रुपये तक के चूड़ियों के सेट उपलब्ध हैं।
वहीं लाख की चूड़ियां महिलाओं की पहली पसंद बनी हुई हैं। साड़ियों की अगर बात करें तो कांजीवरम सिल्क और बनारसी साड़ी महिलाओं को लुभा रहा है। खरीदारी में उछाल आने के चलते दुकानदार भी खुश हैं। वहीं करवा और पोस्टर आदि की बिक्री भी खूब हो रही है। ठेल पर भी इनकी बिक्री मोहल्लों में होती रही।
एक ओर जहां महिलाएं साड़ी और शृंगार का सामान खरीद रहीं हैं तो पुरुष उपहार खरीदने में जुटे हुए हैं। उपहार के रूप में साड़ियों के साथ-साथ अंगूठी और चेन पहली पसंद बने हुए हैं। पुरुषों को हीरे की अंगूठी खूब पसंद आ रही है। बाजार में 25 हजार रुपये से लेकर एक लाख रुपये तक की अंगूठी उपलब्ध है। ज्वैलर्स की दुकानों पर भी ग्राहकों की भीड़ लगी रही।
सलाखों के पीछे भी होंगे चंद्रमा के दर्शन
मैनपुरी। सलाखों के पीछे रहने वाली सुहागिनें भी चंद्रमा का दर्शन कर व्रत तोड़ेंगीं। जेल में बंद करीब 25 महिला बंदी 17 अक्तूबर को करवाचौथ का पूजन विधि विधान से करेंगी। त्योहार को लेकर जेल प्रशासन ने सभी व्यवस्थाएं पूरी कर ली हैं।
जानबूझ कर या अंजाने में हुए एक अपराध ने भले ही उन्हें सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है। घर की याद आती है, पति और बच्चे भी बहुत याद आते हैं, लेकिन अपराध की सजा भुगतने से पहले उनसे मिलना नहीं हो सकता। इन सबके बीच पति की लंबी उम्र की कामना का त्योहार करवाचौथ भला कौन सी महिला भूल सकती है।
जिला कारागार में फिलहाल 71 महिला बंदी हैं, जिसमें से करीब 55 शादीशुदा हैं। इस बार करवाचौथ का व्रत जेल में बंद 25 महिलाएं ही रखेंगी। इसकी तैयारी भी शुरू कर दी गई है। इस दिन चंद्रमा के दर्शन किया जाएगा, पूजा होगी, व्रत भी पूरा किया जाएगा। बस पति आंखों के सामने नहीं होंगे, उसकी तस्वीर ही सहारा बनेगी।
जेल अधीक्षक की मानें तो पूजा की सामग्री आदि की व्यवस्था कर दी गई है। किसी भी तरह की असुविधा नहीं होने दी जाएगी। चांद देखने के साथ ही बैरक में ही पूजा पाठ की जाएगी। महिलाओं के लिए निर्धारित भोजन तैयार किया जाएगा।