क्रिकेट के प्रति जुनून अगर बचपन से रग-रग में हो तो रास्ते खुद बनते चले जाते हैं। चेन्नई सुपर किंग्स की ओर से 14 करोड़ 20 लाख रुपये में खरीदे गए कार्तिक शर्मा की कहानी कुछ ऐसी ही है। जिसमें डांट- पिटाई है तो चिंता और आज गर्व से भरी खुशी भी।
कार्तिक के दादा कैलाश शर्मा बचपन के दिन याद करते हुए बताते हैं कि कार्तिक खेल में इतना डूबा रहता था कि उसे खाना खाने तक का होश नहीं रहता था। स्कूल से लौटते ही वह सीधा मैदान की ओर भाग जाता था। कई बार शाम हो जाती थी और घरवाले उसके लौटने और खाने का इंतजार करते रहते थे।
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बताया कि उस समय उन्होंने कई बार कार्तिक को डांटा और पिटाई भी की, लेकिन आज जब उसे इस मुकाम पर देखते हैं तो दिल खुशी से भर जाता है। कैलाश शर्मा बताते हैं कि उस दौर में उन्हें सबसे ज्यादा चिंता इस बात की रहती थी कि कार्तिक किसी सरकारी नौकरी की ओर जाए। उन्हें लगता था कि खेलकूद में भविष्य सुरक्षित नहीं है, लेकिन कार्तिक ने अपने जुनून और मेहनत से सारी सोच बदल दी।
उधर, कार्तिक की चाची शिवानी शर्मा कहती हैं कि कार्तिक घर का सबसे बड़ा बेटा था। इसलिए पूरे परिवार की जिम्मेदारी और चिंता उसी से जुड़ी रहती थी। शिवानी शर्मा बताती हैं कि कार्तिक को क्रिकेट बेहद पसंद है और महेंद्र सिंह धोनी उसके पसंदीदा खिलाड़ी हैं। अब उन्हें इस बात की खास खुशी है कि कार्तिक धोनी की टीम चेन्नई सुपर किंग्स के लिए खेलेगा। वे चाहती हैं कि कार्तिक शहर के बच्चों के लिए प्रेरणा बने ताकि आगरा के और बच्चे भी क्रिकेट में आगे बढ़ें। ऑक्शन का वह पल परिवार कभी नहीं भूल सकता। शिवानी शर्मा याद करती हैं कि पूरा परिवार और मोहल्ले के लोग टीवी के सामने बैठे थे। जैसे ही कार्तिक 14 करोड़ 20 लाख रुपये में बिके, सभी खुशी से झूम उठे। घर में तालियां गूंजीं, आंखें नम हो गईं। कार्तिक खुद भी इतना भावुक हो गया कि अपनी आंखों से आंसू नहीं रोक सका।
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कार्तिक के चाचा महेश शर्मा, जो आगरा में ही अपनी दुकान चलाते हैं। उन्हों ने भी इस उपलब्धि पर खुशी जाहिर की। कहा कि कार्तिक ने पूरे परिवार और शहर का नाम रोशन किया है। क्रिकेट के मैदान से आईपीएल के मंच तक पहुंचा कार्तिक अब सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि आगरा के हजारों सपनों की पहचान बन चुका है।