वीर-चक्र विजेता हवलदार कुमर सिंह सोगरवल की प्रतिमा
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वीर-चक्र विजेता हवलदार कुमर सिंह सोगरवल की बहादुरी का पूरा देश कायल है। आगरा के फतेहपुर सीकरी स्थित गांव बसैरी काजी निवासी रघुवीर सिंह सोगरवल के सुपुत्र 17 जाट रेजिमेंट के हवलदार कुमर सिंह ने छह और सात जुलाई 1999 की रात-सुबह कश्मीर के द्रास सेक्टर में मुश्कोह घाटी की पिम्पल-एक और पिंपल-दो नामक पहाडियों से जो कारनामा कर दिखाया वह हैरान कर देने वाला है।
हवलदार कुमर सिंह की इस बहादुरी पर उनको मरणोपरांत वीर-चक्र के पुरस्कार से नवाजा गया। लेकिन, शहादत के बाद आज उनकी प्रतिमा अनावरण की राह देख रही है। शासन-प्रशासन शहीद की प्रतिमा का अनावरण करना ही भूल गया।
हवलदार कुमर सिंह सोगरवल 17 जाट रेजिमेंट में 1778 में भर्ती हुए थे। सिपाही से हवलदार बनने के पीछे उनकी सेवा भावना और मेहनत थी। हवलदार कुमर सिंह के दो सुपुत्र और दो सुपुत्रियां हैं। हवलदार कुमर सिंह की शहादत रंग लाई और दुश्मन को जान-माल की भारी क्षति उठाते हुए भागना पड़ा।
शून्य से कम तापमान में हथियार बर्फ में चलाने और बचने के सामान समेत 40 किलो वजन के साथ 18 हजार फीट ऊंची चोटी पर 10 घंटे चढ़ कर आधा सफर तय करने के बाद खुद को दिन भर पत्थरों में समेटे रहना कितना दुष्कर है।
दिन ढलने के समय ही फिर चढाई करके दुश्मन से करीब 20 मीटर दूर पहुंचने के बाद हवलदार कुमर सिंह की टुकड़ी ने धावा बोल कर 16 घुसपैठियों को मार भगाया। इसके बाद पहाड़ियों को पुरी तरह मुक्त कराने के लिए 10 घंटे तक घमासान युद्ध हुआ और पिंपल-1 और पिंपल-2 पर फतह पा ली गई। लेकिन, जांबाज हवलदार कुमर सिंह की कीमत पर।
आज कारगिल युद्घ को बीस बरस होने जा रहे हैं। पूरा देश वीर जवानों की कुर्बानी पर गौरवांवित महसूस कर रहा है। लेकिन, शहीद की प्रतिमा का अनावरण नहीं हो सका है। परिवार के लोगों में नेताओं और प्रशासन के खिलाफ भारी रोष है।
शहीद के बड़े पुत्र सत्येंद्र सिंह ने बताया कि पिता की मृत्यु के बाद जब अंतिम संस्कार हो रहा था तो मौके पर पहुंचे तत्कालीन सांसद राज बब्बर व प्रशासन के अधिकारियों ने शहीद पिता की प्रतिमा लगाने व स्मारक बनाने का आश्वासन दिया था। लेकिन, पिता की प्रतिमा और स्मारक नहीं बन सका। कई बार इस संबंध में प्रशासनिक अधिकारियों से मिले लेकिन, कोई समाधान नहीं हुआ। उनका परिवार नेताओं व प्रशासनिक अधिकारियों की वादाखिलाफी से आहत है।
शहीद की पत्नी बलवीर देवी ने बताया कि अब हमने खुद ही परिवार के लोगों की मदद से करीब बीस लाख रुपये खर्च कर शहीद की प्रतिमा व स्मारक का निर्माण कराया है।
इन की प्रतिमा का अनावरण सितंबर माह में प्रस्तावित है। शहीद की पत्नी इस समय अपने छोटे पुत्र यतेंद्र सिंह के साथ गुरुग्राम हरियाणा में रहती हैं। वहीं भरतपुर में कारगिल शहीद के नाम आवंटित पेट्रोल पंप को उनके पुत्र सतेंद्र संभालते हैं।