बच्ची के पिता स्वास्थ्य विभाग में नौकरी करते हैं। वह छुट्टी लेकर पहले घर आए। सुनवाई होने से पहले ही अपनी पत्नी, पिता व अन्य परिजनों के साथ कोर्ट पहुंच गए। दोपहर करीब एक बजे दोषियों को फांसी की सजा सुनाई गई। बेटी को याद करते हुए उन्होंने कहा कि सजा तो हो गई पर दोषियों के फांसी के फंदे पर लटकने पर ही असली न्याय मिलेगा। तब ही दिल को सुकून आएगा। उन्होंने बताया कि उनकी पोस्टिंग जिले से बाहर है। घटना वाले दिन भी वह ड्यूटी पर थे। जब से रिपोर्ट दर्ज हुई, तब से लगातार पत्नी के साथ मुकदमे की पैरवी कर रहे हैं। 50 से अधिक तारीखें पड़ीं। एक बार भी ऐसा नहीं हुआ कि वह मौजूद न रहे हों।
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कब क्या हुआ
- 18 मार्च 2024 को बालिका लापता हुई
- 19 मार्च को फिरौती के लिए फोन आया, शाम को पुलिस ने बालिका का शव बरामद किया
- 19 मार्च को रिपोर्ट दर्ज हुई
- 19 अप्रैल 2024 को आरोपपत्र दाखिल हुआ
- 26 अप्रैल 2024 से केस का ट्रायल शुरू हुआ
- 1 मई से पत्रावली साक्ष्य में चली
- 8 अक्तूबर 2025 को आरोपी दोषी करार दिए गए
- 16 अक्तूबर को सजा हुई
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