ताजमहल से महज 6.3 किमी दूर कुबेरपुर लैंडफिल साइट पर कूड़े के पहाड़ बने हैं, जबकि कागजों पर इन्हें साफ दिखाया गया है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में आगरा नगर निगम ने केवल 26 हजार मीट्रिक टन पुराना कचरा ही बताया, जबकि यहां 4.25 लाख मीट्रिक टन कचरे के पहाड़ बने हैं। याचिकाकर्ता डॉ. शरद गुप्ता ने एनजीटी में इसके सबूत पेश किए हैं। बुधवार को इस मामले की सुनवाई होनी है।
आगरा नगर निगम को वर्ष 2022 तक कुबेरपुर लैंडफिल साइट पर जमा कचरे के पहाड़ों को प्रोसेसिंग के जरिए समाप्त करना था। यहां एनजीटी के आदेश के तीन साल बाद भी कचरे के पहाड़ बने हैं। आगरा नगर निगम ने डॉ. शरद गुप्ता की याचिका पर एनजीटी में जवाब दाखिल किया, जिसमें कहा गया कि निगम ने 9.40 लाख मीट्रिक टन कचरा प्रोसेस कर दिया है। केवल 26 हजार मीट्रिक टन कचरा ही बाकी है।
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72 एकड़ में फैले कुबेरपुर लैंडफिल साइट पर पहाड़ खत्म करने के बाद पार्क बना दिया गया है। याचिकाकर्ता डॉ. शरद गुप्ता ने आगरा नगर निगम के दावों की पोल एनजीटी के सामने खोली है। उन्होंने एनजीटी में सबूत पेश किए हैं, जिन पर बुधवार को सुनवाई होगी।
पर्यावरण-स्वास्थ्य के लिए खतरा
डॉ. शरद गुप्ता ने कुबेरपुर लैंडफिल साइट पर जाकर नगर निगम के दावों की पोल खोली और जिओ टैगिंग वाले फोटो ट्रिब्यूनल में पेश किए हैं। उन्होंने कहा कि कुबेरपुर में जमा कचरे का पहाड़ पर्यावरण और लोगाें के स्वास्थ्य के लिए खतरा है। नगर निगम ने एनजीटी को गुमराह करने वाली तस्वीरें लगाई है। निगम के दावे झूठे हैं। कचरे के ऊपर ही मिट्टी डालकर हरी घास लगा दी गई है, जबकि कचरे से खाद बनाने का दावा किया गया था। बारिश में इसके नीचे जमा कचरे का रिसाव भूमिगत जल के साथ मिट़्टी को भी दूषित करेगा।
चार साल से प्लांट लगा, न शुरू हुआ
एनजीटी में पेश जवाब में डॉ. शरद गुप्ता ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के वर्ष 2021 के आदेश के चार साल बाद भी कचरे से 15 मेगावाट बिजली बनाने का प्लांट लग नहीं पाया। यहां केवल मिट्टी की भराई और बाउंड्री का काम किया गया है। साइट पर कोई इमारत नहीं बनी है, न मशीनरी लगाई गई है। नगर निगम ने जनवरी 2025 तक 17,84,784 मीट्रिक टन कचरे में से केवल 13,75,978 मीट्रिक टन कचरे की प्रोसेसिंग अपनी रिपोर्ट में मानी है। इस हिसाब से 4.08 लाख मीट्रिक टन कचरा जनवरी तक जमा था जो अब बढ़ गया है। निगम ने इस पर भी एनजीटी में झूठे दावे किए हैं।
डॉ. शरद गुप्ता ने ये की मांग
- कुबेरपुर लैंडफिल साइट का दौरा करने के लिए कमेटी या लोकल कमिश्नर नियुक्त किया जाए।
- एनजीटी वैज्ञानिक तरीके से कचरे का प्रसंस्करण करने के लिए अधिकारियों को निर्देश दे।
- एसडब्ल्यूएम नियम-2016 का पालन करने में विफल रहे अधिकारियों पर दंडात्मक कार्रवाई हो।
- ताज के पास मौजूद क्षेत्र में कचरे के निपटान और निगरानी के लिए समिति का गठन किया जाए।
- एनजीटी को हर तिमाही या छमाही कचरे के निस्तारण की रिपोर्ट दाखिल की जाए।
आबादी में हो रहा कूड़ा डंप, आग लगाकर निस्तारण
नगर में प्रतिदिन पालिका की ओर से टैक्टर-ट्रॉलियों से उठने वाले कूड़े को कस्बे के आबादी वाले क्षेत्र में डाला जा रहा है। आरोप है कि निस्तारण के नाम पर उसमें आग लगा दी जाती है। जिसके धुएं के कारण लोगों को परेशानी होती है। बच्चों और बस्ती के लोगों का दम घुटता है। कस्बे के लोगों ने बताया कि खंदौली रोड पर सीएचसी केंद्र के पास व मोहल्ला सतौली में रेलवे लाइन के पास नगर का कूड़ा डाला जा रहा है। डंप कूड़े में कर्मचारी आग लगा देते हैं। जबकि नई आबादी व रेलवे लाइन के पास के प्राथमिक विद्यालय के अलावा कई अन्य स्कूल भी हैं। धुएं से छात्र-छात्राओं और आसपास रहने वाले लोगों का सांस लेना मुश्किल है। कस्बे के मुकेश कुमार, ओशीद कुमार, रिंकू सेठ, शमशाद, सतेंद्र यादव आदि ने पालिका अध्यक्ष और अधिशासी अधिकारी से कूड़े जलाने से रोकने और समस्या के समाधान की मांग की है। वहीं पालिकाध्यक्ष डॉ. सुरेश कुशवाह ने बताया कूड़े के ढेर पहले से ही लगे हुए हैं, जिनमें अचानक आग लग जाती है। कूड़ा निस्तारण के लिए भेजा जाता है।