पर्यावरण-स्वास्थ्य के लिए खतरा
डॉ. शरद गुप्ता ने कुबेरपुर लैंडफिल साइट पर जाकर नगर निगम के दावों की पोल खोली और जिओ टैगिंग वाले फोटो ट्रिब्यूनल में पेश किए हैं। उन्होंने कहा कि कुबेरपुर में जमा कचरे का पहाड़ पर्यावरण और लोगाें के स्वास्थ्य के लिए खतरा है। नगर निगम ने एनजीटी को गुमराह करने वाली तस्वीरें लगाई है। निगम के दावे झूठे हैं। कचरे के ऊपर ही मिट्टी डालकर हरी घास लगा दी गई है, जबकि कचरे से खाद बनाने का दावा किया गया था। बारिश में इसके नीचे जमा कचरे का रिसाव भूमिगत जल के साथ मिट़्टी को भी दूषित करेगा।
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चार साल से प्लांट लगा, न शुरू हुआ
एनजीटी में पेश जवाब में डॉ. शरद गुप्ता ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के वर्ष 2021 के आदेश के चार साल बाद भी कचरे से 15 मेगावाट बिजली बनाने का प्लांट लग नहीं पाया। यहां केवल मिट्टी की भराई और बाउंड्री का काम किया गया है। साइट पर कोई इमारत नहीं बनी है, न मशीनरी लगाई गई है। नगर निगम ने जनवरी 2025 तक 17,84,784 मीट्रिक टन कचरे में से केवल 13,75,978 मीट्रिक टन कचरे की प्रोसेसिंग अपनी रिपोर्ट में मानी है। इस हिसाब से 4.08 लाख मीट्रिक टन कचरा जनवरी तक जमा था जो अब बढ़ गया है। निगम ने इस पर भी एनजीटी में झूठे दावे किए हैं।
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